कृषि व्यावसायिक प्रशिक्षण को मिलेगा बढ़ावा
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स्कूली विद्यार्थियों के लिए कृषि व्यावसायिक प्रशिक्षण को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत 1.7 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित अत्याधुनिक कृषि इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन डॉ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में किया गया। यह केंद्र विश्वविद्यालय और समग्र शिक्षा हिमाचल प्रदेश के बीच साझेदारी के तहत विकसित किया गया है। यह पहल एजुकेशन मंत्रालय के अंतर्गत विश्व बैंक द्वारा वित्तपोषित स्टार्स प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इस सुविधा का उद्घाटन कुलपति प्रो राजेश्वर सिंह चंदेल द्वारा विश्वविद्यालय के वैधानिक अधिकारियों तथा परियोजना से जुड़े संकाय सदस्यों की उपस्थिति में किया गया।
यह इनक्यूबेशन सेंटर आधुनिक अवसंरचना से सुसज्जित है, जिसमें आईओटी लैब, कंप्यूटर लैब, ग्रीनहाउस लैब, एसटीएल लैब तथा 40 विद्यार्थियों की क्षमता वाला कक्षा शामिल है। इसके अतिरिक्त, केंद्र में ड्रोन, मेटा क्वेस्ट उपकरण, आधुनिक टैबलेट, हाइड्रोपोनिक प्रणाली, वर्षा जल संचयन इकाइयाँ तथा मृदा परीक्षण किट जैसी उन्नत सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं।
विश्वविद्यालय और समग्र शिक्षा के बीच यह साझेदारी कृषि को व्यावसायिक शिक्षा के रूप में अपनाने वाले विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने तथा उनमें उद्यमशील कौशल विकसित करने के उद्देश्य से की गई है। इस परियोजना से राज्य के लगभग 227 विद्यालयों के 5,000 से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिलने की संभावना है, जिसकी कुल लागत लगभग 2.8 करोड़ रुपए है।
इस अवसर पर प्रो. चंदेल ने कहा कि यह इनक्यूबेशन सेंटर अपनी आधुनिक सुविधाओं के साथ विद्यार्थियों को कृषि के क्षेत्र में नवीनतम ज्ञान एवं व्यावहारिक कौशल प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में तकनीकी दक्षता, व्यावहारिक कौशल तथा पेशेवर दृष्टिकोण का विकास करना है, ताकि वे कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें। नवाचार, अनुभवात्मक अधिगम और कौशल विकास को बढ़ावा देकर यह केंद्र विद्यार्थियों को क्षेत्र की उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करेगा। यह परियोजना नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 की परिकल्पना के अनुरूप है, जो शिक्षा की गुणवत्ता और व्यावसायिक दक्षता को बढ़ाने के लिए अकादमिक जगत और उद्योग के बीच की दूरी को कम करने पर बल देती है। प्रो. चंदेल ने कौशल विकास के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि उद्यमशील सोच का विकास और युवाओं की रोजगार क्षमता को बढ़ाना प्रमुख प्राथमिकताएँ हैं।















