वेतन समझौते बंद कर आरवीटे्रशन अवार्ड लागू करे केंद्र सरकार : बबलू पंडित

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DNN शिमला

देशभर में सीमेंट उद्योगों में कार्यरत समस्त कामगारों व कर्मचारियों का दशकों से वेतन समझौते के नाम पर हो रहा आर्थिक शोषण चिंता का विषय है। जिस पर न तो प्रदेश सरकारें और न ही केंद्र सरकार कोई कारगर नीति लागू कर रही है। इंटक के प्रदेशाध्यक्ष बबलू पंडित ने कहा कि सीमेंट क्षेत्र में कार्यरत मजदूर भी राष्ट्र निर्माण में एक अहम स्तंभ है जो देश निर्माण के लिए विपरीत परिस्थितियों में काम करते हुए सदियों से अपने जीवन की आहूति दे रहे हैं। लेकिन आज सीमेट क्षेत्र के कर्मचारियों की अनदेखी, भेदभाव व शोषण के कारण आज इस वर्ग की दशा जर्जर हो चुकी है। कामगारों के दम पर बहुराष्ट्रीय कंपनियां अरबों का मुनाफा कमा रही हैं लेकिन कर्मचारियों को उनके हक से वंचित रखा जा रहा है। बबलू पंडित ने कहा कि बड़ी हैरानी की बात है कि वर्ष 1983 के बाद से केंद्र सरकार ने आरवीटेट्र नियुक्त नहीं किए। जबकि प्रदेश सरकारों ने इस संबंध में किसी भी तरह का बोर्ड गठित करने से साफ इंकार कर दिया है। 1983 से लेकर आज तक सीमेट उद्योगों में वेतन समझौते ही हो रहे हैं। इंटक प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि सीमेंट कर्मचारियों की दशा के लिए सरकारें, सीमेंट कंपनियां, सीमेंट कर्मचारियों का स्वार्थी नेतृत्व, सीमेंट वेतनवृद्धि के लिए मौजूद व्यवस्थात्मक प्रावधानों का इस व्यवस्था में मौजूद तत्वों द्वारा अपरी अपनी स्वार्थसिधी के लिए दुरूपयोग हो रहा है। बबलू पंडित ने कहा कि सीमेंट कंपनियों के प्रबंधक वर्ग द्वारा सीमेंट कर्मचारियों व मानव संसाधन का आर्थिक शोषण करके अप्राकृतिक दोहन किया जा रहा है जिसे इंटक किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। सीमेंट वेतन समझौते स्थानीय व राष्ट्रीय स्तर पर समीेत कंपनियों व इन तत्वों का सुनियोजित षडय़ंत्र है और मजदूरों के आर्थिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है।

1983 में इंदिरा सरकार ने किया था आरवीटे्रशन अवार्ड घोषित
बबलू पंडित ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी जी ने वर्ष 1983 में आरवीटेशन अवार्ड घोषित किया था। जिसके तहत आरवीटे्रटर नियुक्त किए गए थे और 2 साल तक चली नगोसिएशन के बाद वेतन संशोधन हुआ था। तब से लेकर आज तक केवल और केवल वेतन समझौते हो रहे हैं जो कि सीमेंट कर्मचारियों का शोषण है। इंटक ने मांग उठाई है कि केंद्र सरकार आरवीटे्रशन नीति को जल्द से जल्द लागू करे नहीं तो इंटक सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन को मजबूर हो जाएगी। यही नहीं इस बाबत प्रदेश से लेकर केंद्र तक विशेष अभियान चलाया जाएगा और इंटक आरवीटे्रशन अवार्ड को घोषित करवाकर रहेगी। बबलू पंडित ने कहा कि आखिर कब तक सीमेंट कर्मचारियों को प्रदेश व केंद्र सरकारों की दमनकारी नीतियों का ग्रास बनना पड़ेगा। बबलू पंडित ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक केंद्र सरकार इस बाबत नीति को लागू नहीं करती तब तक इंटक चैन से नहीं बैठेगी। इस मौके पर उनके साथ वरिष्ठ महामंत्री महिमन चंद्र, प्रदेश उपाध्यक्ष भगत सिंह वर्मा, प्रदेश मीडिया प्रभारी ओम शर्मा, एसपी कौशल, बिलासपुर इंटक के सचिव अमरजीत, सीमेंट कामगार सतीश ठाकुर, शेर सिंह ठाकुर, कर्म सिंह, नंदलाल, प्रेम ठाकुर समेत भारी संख्या में कामगार उपस्थित रहे।

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