देव भूमि हिमाचल प्रदेश बना रेफर प्रदेश: अभिषेक राणा

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DNN सोलन

24 सितंबर  हिमाचल कांग्रेस सोशल मीडिया विभाग के चेयरमैन एवं प्रवक्ता अभिषेक राणा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश का नाम बदलकर अब रेफर प्रदेश रख देना चाहिए क्योंकि हमारे प्रदेश में भाजपा सरकार की अव्यवस्थाओं और गलत नीतियों के चलते स्वास्थ्य सुविधाओं की रीढ़ टूट चुकी है। आरटीआई के माध्यम से यह खुलासा हुआ है कि हिमाचल प्रदेश में ढाई लाख से अधिक लोग साल दर साल बाहरी राज्यों जैसे कि चंडीगढ़ व जालंधर इत्यादि में अपना इलाज करवाने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि पीजीईआर से ली गई आरटीआई ने अनुसार 2018- 2,27,576 मरीज़, 2019- 2,35,657 मरीज़, 2020- 75,407 मरीज़, 2021 (जुलाई तक)- 40,152 मरीज़ हिमाचल से इलाज के लिए पीजीईआर गए।

उपरोक्त आरटीआई में हर साल का लेखा जोखा उपलब्ध है जो यह दर्शाता है कि 70 लाख की जनसंख्या वाला यह प्रदेश अब रेफर प्रदेश बन चुका है। और सिर्फ यही नहीं, कोरोना काल के दौरान भी हिमाचल प्रदेश के लाखों मरीजों ने अपना इलाज चंडीगढ़ पीजीआई में करवाया। इस महामारी के समय जनता को राहत प्रदान करना तो दूर की बात है, कोरोना मरीजों के लिए आए उपकरणों का पैसा भी प्रदेश की भाजपा सरकार घोटालों में गबन कर गई।
हिमाचल प्रदेश की गरीब जनता को भी मजबूरी में सरकारी अस्पतालों में इलाज न मिलने के चलते प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करवाना पड़ता है जहां पर उन्हें एक मोटे खर्च की अदायगी करनी पड़ती है। कांग्रेस द्वारा एक आरटीआई का खुलासा और किया जाएगा जिसमें की इस यह ब्यौरा भी होगा कि सरकारी अस्पतालों से हर साल कितने लोगों को प्राइवेट अस्पतालों या बाहरी राज्यों में रेफर किया जाता है। और कहीं ना कहीं सरकारी अस्पतालों की प्राइवेट अस्पतालों से सांठगांठ भी नजर आती है।

टांडा मेडिकल कॉलेज हो या फिर शिमला मेडिकल कॉलेज और अन्य कोई भी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र हिमाचल प्रदेश में कहीं पर भी न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही इलाज हेतु जरूरी उपकरण। प्रदेश के लगभग तमाम अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड इत्यादि की मशीनें या तो है नहीं और जो है वह भी खस्ता हालत में है जिनका लाभ प्रदेशवासी ही नहीं उठा पा रहे।

 

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