प्रशिक्षित बेरोजगार शारीरिक शिक्षक संघ सोलन भी आगामी पंचायती चुनाव के बहिष्कार का कर रहा है विचार

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DNN कुनिहार (Kunihar News) (चन्द्र प्रकाश)

23 अक्टूबर।  कई वर्षों से सरकारी नौकरी न मिलने एवं सरकार के उपेक्षा पूर्ण रवैए की वजह से हताश एवं खफा होकर के बेरोजगार प्रशिक्षित शारीरिक शिक्षक संघ सोलन भी आगामी पंचायती चुनाव का अपने अपने परिवार सहित बहिष्कार एवं अपनी डिग्री एवं डिप्लोमा को सरकार को सौंपने का विचार कर रही है ।  वर्तमान प्रदेश सरकार के शारीरिक शिक्षा एवं शारीरिक शिक्षकों के प्रति उदासीन एवं उपेक्षा पूर्ण रवैया वजह से हिमाचल प्रदेश में सभी शारीरिक शिक्षक एवं कला अध्यापक ठगा सा महसूस कर रहे हैं । इसके बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए संघ के प्रधान यतेंद्र पाल ,उप प्रधान धर्मपाल, महासचिव राजेंद्र कुमार, सह सचिव सतवीर, संघ के कोषाध्यक्ष देवेंद्र कुमार एवं सह कोषाध्यक्ष धनपाल ने बताया कि संघ के कार्यकारिणी के प्रतिनिधियों ने वर्तमान सरकार के समक्ष कई बार इस मुद्दे को बड़े जोर से उठाया परंतु अभी तक मात्र संघ को प्रदेश सरकार से मात्र आश्वासन ही मिले। व्यवहारिक रुप से इस विषय पर कोई भी उचित कदम सरकार द्वारा अभी तक नहीं उठाया गया है ।  इस तरह प्रदेश सरकार द्वारा अभी तक हिमाचल में शारीरिक शिक्षकों के एक भी पद के सृजन के बारे में फैसला ना लेकर सरकार ने कैबिनेट में इस बारे में अधिसूचना जारी नहीं की । जिससे प्रदेश में हजारों की संख्या में बेरोजगार प्रशिक्षित शारीरिक शिक्षक सरकार के इस प्रकार के उदासीन पूर्ण रवैया से अपने को असहज एवं ठगा सा महसूस कर रहे हैं । इससे प्रदेश स्तर पर शारीरिक शिक्षकों का सरकार के प्रति आक्रोश बढ़ रहा है । शारीरिक शिक्षा में 20 – 22 वर्ष पहले डिग्री डिप्लोमा किए हुए बिरोजगार आज दर- बदर रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं परंतु सरकार को अभी तक इनकी सुध नहीं है।  वैसे हिमाचल प्रदेश में शारीरिक शिक्षको के सरकारी स्कूलों में हजारों पद रिक्त पड़े हैं । बार-बार सरकार शिक्षा के अधिकार का हवाला देते हुए प्रदेश में सौ से कम संख्या वाले स्कूलों की संख्या अधिक होने के कारण ना भरने का बात कर रही है।  बेरोजगार प्रशिक्षित शारीरिक शिक्षक संघ सोलन ने एक बार फिर से प्रदेश सरकार को चेताया है कि यदि पंचायती चुनाव से पहले सरकार ने शारीरिक शिक्षकों एवं कला अध्यापकों के पदों से संबंधित शीघ्र अधिसूचना जारी न की एवं इस विषय पर उचित कदम ना उठाया तो वे आगामी प्रदेश स्तर पर पंचायती चुनाव का बहिष्कार करेंगे और अपने डिग्री डिप्लोमा सरकार को सौंप देंगे क्योंकि वर्तमान समय में सरकार के उपेक्षा पूर्ण रवैया से उनकी सार्थकता और प्रासंगिकता खत्म हो रही है।

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