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डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय (यूएचएफ), नौणी के पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा 13 से 15 जुलाई, 2026 तक ‘डिजिटल जलवायु-स्मार्ट पर्वतीय कृषि’ विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण एवं अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के 25 किसानों तथा दो अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम को उत्तराखंड सरकार के उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के मिशन निदेशक द्वारा प्रायोजित किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को जलवायु-अनुकूल कृषि तकनीकों, मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाओं, फसल बीमा, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा पर्वतीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त सतत बागवानी पद्धतियों के संबंध में ज्ञान एवं कौशल प्रदान करना था।
उद्घाटन सत्र में प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. एम. एस. जांगड़ा ने हिमालयी क्षेत्र में जलवायु-स्मार्ट कृषि की आवश्यकता एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। पर्यावरण विज्ञान विभाग की विभाग अध्यक्ष डॉ. परमिंदर कौर बावेजा ने प्रतिभागियों को पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना की जानकारी देते हुए बताया कि यह योजना किसानों को मौसम संबंधी जोखिमों से होने वाले नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों ने जलवायु-स्मार्ट कृषि के लिए जैव-आधारित समाधान, कृषि-मौसम परामर्श सेवाएं एवं मोबाइल एप्लीकेशन, जैव उर्वरक एवं पौध वृद्धि प्रोत्साहक राइजोबैक्टीरिया (पी. जी. पी. आर.), समशीतोष्ण फल फसलों के प्रवर्धन की तकनीकें, बागों में मृदा उर्वरता प्रबंधन, परागण प्रबंधन, सीवेज स्लज कम्पोस्टिंग, मशरूम उत्पादन आधारित उद्यमिता तथा मृदा एवं जल संरक्षण के लिए समेकित जल निकास उपायों जैसे विषयों पर व्याख्यान दिए।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने विश्वविद्यालय के औषधीय एवं सुगंधित पौधों के उद्यान, सोलन स्थित क्लाइमेट स्मार्ट मॉडल गार्डन तथा क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, मशोबरा का भ्रमण किया, जहां उन्हें आधुनिक बागवानी तकनीकों एवं बाग प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके अतिरिक्त, प्रतिभागियों को विश्वविद्यालय की कृषि मौसम वेधशाला का भी भ्रमण करवाया गया, जहां उन्हें मौसम मापन उपकरणों तथा कृषि निर्णयों में मौसम पूर्वानुमान की भूमिका से अवगत कराया गया।
प्रतिभागियों ने वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों के साथ सक्रिय संवाद किया तथा अपने कृषि कार्यों में जलवायु-स्मार्ट तकनीकों को अपनाने में गहरी रुचि दिखाई। समापन समारोह में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह प्रशिक्षण उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि की जलवायु सहनशीलता, उत्पादकता तथा सतत विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।














