DNN हमीरपुर 25 मई
बीजेपी को प्रचंड बहुमत से जिताने के बाद अगर प्रदेश के लाखों कर्मचारी खुद को आहत और प्रताडि़त महसूस कर रहे हैं, लाखों शिक्षित युवा नौकरी की आस में निराश व हताश हो रहे हैं तो दोष सरकार और सरकारी ढांचे में है, जिससे अब जनता को निजात पाना बेहद जरुरी है। यह बात प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष एवं विधायक राजेंद्र राणा ने यहां जारी प्रेस बयान में कही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर जिला में छोटी-मोटी नौकरी करने वालों को वेतन व मानदेय के लाले पड़ गए हैं। आलम यह है कि मानदेय लेना अब भीख मांगने के सामान हो चुका है। राणा ने कहा कि सिरमौर में आशा वर्करों के तलवे मानदेय लेने के लिए इस कार्यालय से उस कार्यालय में जाते-आते घिस रहे हैं लेकिन हैरानी यह है कि न तो सरकारी तंत्र आशा वर्करों की बात सुन रहा है न ही सरकार उनकी बात सुनने को राजी है। सिरमौर की आशा वर्करों को तीन महीने से मानदेय नहीं मिला है लेकिन बीजेपी की जुमलेबाज सरकार कह रही है कि हिमाचल शिखर की ओर अग्रसर है। इसी तरह आम नागरिकों की मूलभूत स्वास्थ्य सुविधा को पूरी करने वाले 108 एंबुलेंस कर्मचारियों की मांगें पूरी न होने के कारण कर्मचारियों ने हड़ताल का ऐलान किया है। लेकिन सरकार नई-पुरानी कंपनी के चक्कर में कर्मचारियों की न सुन कर कंपनी के हितों की परोक्ष सुरक्षा करने में जुटी है।
एंबुलेंस 108 के कर्मचारियों को आउटसोर्स पर रखने वाली जीवीके कंपनी में वर्ष 2015 से लेकर अब तक कर्मचारियों को एरियर तक नहीं दिया है। 343 एंबुलेंस चालकों से साथ 1200 कर्मचारी सरकार की इस अनदेखी से लगातार आहत व प्रताडि़त हो रहे हैं। सरकार के घोर उदासीन रवैये को देखते हुए अब एंबुलेंस कर्मचारियों ने हर जिला के डीसी को ज्ञापन देकर हड़ताल करने का ऐलान किया है। लेकिन सरकार कर्मचारियों के हितों से बेखबर होकर गुंगी और बहरी बनी हुई है। राणा ने कहा कि प्रदेश के लोकतंत्र के इतिहास में बीजेपी सरकार एक ऐसी सरकार साबित हुई है जिस सरकार के राज में हर वर्ग हताश और निराश हो चुका है लेकिन सरकार अभी भी जुमलेबाजी करती हुई प्रदेश की जनता को गुमराह करने में लगी है। राणा ने कहा कि कृषि बीमा के नाम पर प्रदेश के किसानों के हितों से भारी खिलवाड़ हुआ है। कृषि बीमा के नाम पर बीमा कंपनियां तो रातोंरात मालामाल हुई हैं लेकिन किसान लगातार कंगाल हुआ है। राणा ने कहा कि कृषि बीमा के खेल में प्रदेश के किसानों को फूटी कौड़ी का लाभ नहीं मिला है जबकि कृषि बीमा कंपनियों ने कृषि बीमा के नाम पर हजारों करोड़ रुपए मुनाफा कमाया है। राणा ने कहा कि बद से बदतर हो रहे हालात बता रहे हैं कि फर्जी राष्ट्रवाद के नाम पर पूंजीवाद को स्थापित करके सरकार देश में फिर ईस्ट इंडिया सरीखी कंपनियों का साम्राज्य कायम करना चाह रही है। उन्होंने कहा कि जिस सरकार के राज में 20 हजार करोड़ से ज्यादा की फर्जी डिग्रियां बेची गई हों। भर्तियों के नाम पर हजारों करोड़ रुपए बेरोजगारों को रोजगार देने के नाम पर लूटे गए हों उस सरकार व सिस्टम पर से जनता का भरोसा उठना स्वाभाविक है।















