DNN सोलन
डॉ वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी की सत्यनंद स्टोक्स लाइब्रेरी द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सहयोग से ‘कृषिकोष रिपोजिटरी- कृषि ज्ञान को सुदृढ़ करने के लिए एक उपकरण’ विषय पर एक प्रशिक्षण व संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में संकाय, सदस्यों और विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर छात्रों के भाग लिया। विश्वविद्यालय के 250 से अधिक लोगों ने इस कार्यशाला में भाग लिया। इस संवेदीकरण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ‘कृषिकोष रिपोजिटरी’ में उपलब्ध शोध में डिजिटल सामग्री पर छात्रों और संकाय को अवगत करना था। विश्वविद्यालय पुस्तकालय ने कृषिकोष डेटाबेस में 3813 को डिजिटाइज किया है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय लाइब्रेरियन डॉ अंजू एस खन्ना ने सामान्य रूप से डिजिटलीकरण और विशेष रूप से पुस्तकालय में कृषिकोष के लाभ पर अपने विचार रखें। उन्होंने सभी से पुस्तकालय में उपलब्ध डिजिटल सुविधाओं का अधिकतम उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि छात्र कृषिकोष डेटाबेस में लाइब्रेरी में उपलब्ध सभी थिसिस को ब्राउज़ कर सकते हैं क्योंकि इन सभी का डिजिटलीकृत कर दिया गया है। इस मौके पर डॉ अमेन्द्र कुमार ने कृषिकोष पर विस्तृत प्रस्तुति दी। आईसीएआर के कृषिकोष रेपोसीटरी में वर्तमान में 97,000 से अधिक थेसिस उपलब्ध हैं ताकि अनुसंधान कार्य की नकल (duplication) से बचा जा सके। डिजिटलीकरण के युग में, इस तरह के प्रशिक्षण विश्वविद्यालय के छात्रों और संकाय के लिए बहुत उपयोगी और फायदेमंद हैं। छात्रों और संकाय के लाभ के लिए भविष्य में भी इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करने का प्रस्ताव है। सहायक लाइब्रेरियन डॉ नीलम शर्मा और यशोधा नेगी भी अवसर पर उपलब्ध रहीं।















