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सोलन, 4 अप्रैल : आर.एल.ए. सोलन से जुटे एक बड़े घोटाले में पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस पूरे मामले में एक बड़े संगठित साइबर नेटवर्क को चलाया जा रहा था और करोड़ों रुपए का लेन देन इसमें हुआ है। अभी मामले की जांच चल रही है और इसमें बड़े खुलासे होने की संभावना भी है। मामले की जानकारी देते हुए पुलिस अधीक्षक सोलन साई दत्तात्रेय वार्मा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में जितेन्द्र ठाकुर (41), अनिल कुमार (42), राज कुमार उर्फ सन्नी (39), जितेन्द्र कुमार (34), नरेश कुमार (43) और विकास सिंह उर्फ शालू (27) शामिल हैं। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जा रहा है।
एसपी सोलन ने बताया कि यह मामला 26 जनवरी 2026 को उस समय सामने आया जब क्षेत्रीय परिवहन एवं लाइसेंसिंग प्राधिकरण (आरएलए) सोलन की अधिकारी डॉ. पूनम बंसल द्वारा पुलिस अधीक्षक कार्यालय के माध्यम से एक शिकायत दर्ज करवाई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कुछ वाणिज्यिक वाहनों के पंजीकरण, भार क्षमता में संशोधन तथा स्वामित्व हस्तांतरण में गंभीर अनियमितताएं की गई हैं।
जांच के दौरान सामने आया कि वाहनों (HP-14D-4512, HP-14D-4582, HP-14D-4586) के रिकॉर्ड में वाहन पोर्टल पर अवैध छेड़छाड़ की गई थी। साथ ही पंजीकरण लिपिक जितेन्द्र ठाकुर द्वारा कई उपयोगकर्ता पहचान (यूजर आईडी) और मोबाइल नंबरों का दुरुपयोग कर संदिग्ध गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। यह भी पाया गया कि लेन-देन अधिकृत सरकारी नेटवर्क के बाहर स्थित इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) पते से किए गए थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों द्वारा उप पुलिस अधीक्षक अशोक चौहान के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। टीम ने तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर गहन जांच शुरू की।
जांच में खुलासा हुआ कि संबंधित वाहनों का पंजीकरण निर्धारित प्रक्रिया के बिना किया गया था। न तो मोटर वाहन निरीक्षक द्वारा अनिवार्य निरीक्षण किया गया और न ही आवश्यक दस्तावेज पूरे थे। इसके बावजूद वाहन पोर्टल पर अभिलेखों में अवैध तरीके से बदलाव कर पंजीकरण और स्वामित्व से जुड़ी प्रविष्टियों में फेरबदल किया गया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरएलए सोलन कार्यालय में कार्यरत क्लर्क जितेन्द्र ठाकुर की आधिकारिक पहचान के अलावा जीतेंहा और डा.पूनम नाम से फर्जी उपयोगकर्ता पहचान बनाई गई थीं। इनका इस्तेमाल कर वाहन सत्यापन और अनुमोदन की प्रक्रिया को अवैध रूप से पूरा किया गया।
तकनीकी जांच जिसमें इंटरनेट प्रोटोकॉल अभिलेख, एक बार उपयोग होने वाले पासवर्ड (ओटीपी) अभिलेख तथा कॉल विवरण अभिलेख का विश्लेषण शामिल था, के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि इस पूरे नेटवर्क का मुख्य आरोपी आरएलए झंडूता में कार्यरत क्लर्क गौरव भारद्वाज है। आरोपी ने सोलन आरएलए के प्रशासकीय लॉगिन विवरण का दुरुपयोग कर पोर्टल में अवैध प्रवेश किया और फर्जी पहचान बनाकर प्रणाली को प्रभावित किया।
एस.पी. साई दत्तात्रेय वार्मा ने बताया कि आरोपी गौरव भारद्वाज ने इस अवैध कार्य के लिए एजेंटों का एक नेटवर्क तैयार किया हुआ था। इन एजेंटों के माध्यम से वाहन मालिकों से अवैध धन वसूला जाता था और बदले में वाहनों के दस्तावेजों में हेराफेरी की जाती थी। इसमें भार क्षमता बढ़ाना, स्वामी क्रम संख्या बदलना, ऋणाधिकार (हाइपोथिकेशन) हटाना और बिना प्रक्रिया के स्वामित्व हस्तांतरण करना शामिल था।
वित्तीय जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के खातों में विभिन्न एजेंटों के माध्यम से करोड़ों रुपए का लेन-देन हुआ है, जो एक संगठित आर्थिक अपराध और आपराधिक षड्यंत्र की पुष्टि करता है।
एस.पी सोलन ने कहा कि इस मामले में जांच अभी जारी है और अन्य संभावित आरोपियों तथा नेटवर्क की पहचान की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस संगठित साइबर एवं दस्तावेजी धोखाधड़ी में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।















