राज्य के 59,829 परिवार अब तक बीपीएल सूची में शामिल
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मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) परिवारों की पहचान के लिए सर्वेक्षण का चौथा चरण 1 फरवरी, 2026 से शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का हर पात्र गरीब परिवार का नाम बीपीएल सूची में शामिल करने का उद्देश्य है, ताकि उन्हें सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि यह सर्वेक्षण पांच चरणों में किया जाएगा, ताकि कोई भी जरूरतमंद परिवार छूट न जाए।
उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण के पहले तीन चरणों में प्रदेश भर में कुल 59,829 परिवारों को बीपीएल सूची में शामिल किया गया है। जिलेवार आंकड़ों के अनुसार बिलासपुर में 2,204, चंबा में 13,786, हमीरपुर में 3,480, कांगड़ा में 10,807, किन्नौर में 1,109, कुल्लू में 2,957, लाहौल-स्पीति में 206, मंडी में 12,045, शिमला में 4,522, सिरमौर में 1,277, सोलन में 1,567 और ऊना में 5,869 परिवारों को बीपीएल घोषित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने बीपीएल सूची में शामिल करने के लिए कुछ मुख्य पात्रता शर्तें भी निर्धारित की हैं। जिन परिवारों में 27 वर्ष तक के अनाथ बच्चे, 59 वर्ष से अधिक उम्र के सदस्य, या 27 से 59 वर्ष की आयु के दिव्यांग सदस्य हैं, वे बीपीएल में शामिल किए जा सकते हैं। इसके अलावा जिन परिवारों की मुखिया महिला हो और परिवार में 27 से 59 वर्ष के बीच कोई वयस्क पुरुष सदस्य न हो, तथा जिन परिवारों के मुखिया को 50 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता हो, उन्हें भी बीपीएल सूची में रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि अन्य पात्र परिवारों में वे परिवार शामिल होंगे जिन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष में मनरेगा के तहत कम से कम 100 दिन काम किया हो। साथ ही जिन परिवारों के कमाने वाले सदस्य कैंसर, अल्जाइमर, पार्किंसन, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, हीमोफीलिया जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हों या कोई ऐसी बीमारी हो जिससे स्थायी दिव्यांगता होती हो, उन्हें भी बीपीएल में शामिल किया जाएगा। प्रदेश सरकार ने पक्के मकान वाले वे परिवार जिन्होंने राज्य या केंद्र सरकार की आवास योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता ली है, उन्हें भी बीपीएल सूची में शामिल करने का निर्णय लिया है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, विधायक चंद्रशेखर, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, सचिव अमरजीत सिंह, निदेशक राकेश प्रजापति तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थेे।
मुख्यमंत्री ने डीडीटीएंडजी को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किए जाने पर दी शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश के डिजिटल टेक्नोलॉजीज एंड गवर्नेंस (डीडीटीएंडजी) विभाग को नई दिल्ली में आयोजित 6वें गवर्नेंस नाउ डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन समिट एंड अवॉर्ड्स में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किए जाने पर शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि राज्य की प्रमुख नवाचार पहल ‘हिम परिवार’ को शासन को सुदृढ़ बनाने और जनसेवा वितरण में सुधार के लिए डिजिटल तकनीकों के नवोन्मेषी उपयोग के लिए सराहा गया है।
यह पुरस्कार हाल ही में शिखर सम्मेलन के दौरान प्रदान किया गया था और कल मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (डिजिटल प्रौद्योगिकी, नवीनीकरण और गवर्नेंस) गोकुल बुटेल द्वारा औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री को सौंपा गया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल के माध्यम से परिवार-आधारित नागरिक केन्द्रित एक व्यापक डेटाबेस तैयार किया गया है, जिससे लाभार्थियों की सटीक पहचान संभव होती है। इससे कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लक्षित वर्गों तक पहुंचाया जाता है। उन्होंने कहा कि यह समान नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी और तकनीक-आधारित शासन के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।
उन्होंने कहा कि राज्य में मजबूत डिजिटल पब्लिक अधोसंरचना विकसित करने और नागरिकों के लिए उपयोगी डिजिटल सेवाएं उपलब्ध करवाने में विभाग द्वारा किए गए प्रयास सराहनीय है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विभाग भविष्य में भी इसी समर्पण के साथ कार्य करते हुए डिजिटल गवर्नेंस पहलों को और सुदृढ़ करेगा, ताकि हिमाचल प्रदेश के लोग व्यापक रूप से लाभान्वित हो सके।
प्रदेश सरकार कर रही गांवों का समावेशी विकास सुनिश्चित
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्वीकृत विभिन्न क्षेत्रीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए विभागों को निर्देश दिए कि सभी लंबित विकास कार्यों को अगले तीन महीनों के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की लगभग 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। राज्य में ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को प्रमुखता प्रदान की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहे चहुंमुखी विकास से राज्य के सतत और समावेशी विकास को आंका जा सकता है।
बैठक के दौरान कई क्षेत्रीय कार्यों में धनराशि की स्वीकृति के उपरांत भी परियोजना के शुरू होने में विलम्ब अथवा इनकी धीमी गति पर समीक्षा की गई। इनमें पिछड़ा क्षेत्र उप-योजना, एमपीएलएडी, विधायक क्षेत्र विकास निधि योजना, लोकल एरिया डेवलपमेंट फंड, मुख्यमंत्री ग्राम पथ योजना तथा अन्य विधायक-वित्तपोषित योजनाओं के अंतर्गत परियोजनाओं की समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कई छोटे लेकिन आवश्यक कार्य जैसे हैंडपंपों की स्थापना, पैदल रास्तों, नालियों, सामुदायिक भवनों, रिटेनिंग वॉल, फुट ब्रिज, सिंचाई नहरों, चारदीवारी और गांव की सड़कों आदि का निर्माण से संबंधित कार्य लंबित पड़े हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के विकेन्द्रित और आवश्यकता आधारित कार्य सीधे स्थानीय लोगों से जुड़े हुए होते हैं तथा ग्रामीण अधोसंरचना मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के गठन के बाद से ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के सिद्धांत को आत्मसात करते हुए प्रणालीगत असंतुलनों में सुधार करना और ग्रामीण विकास प्रणाली को पुनःस्थापित करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कई छोटेे कार्य लंबे समय तक लंबित रहते हैं जबकि उनके लिए धनराशि पहले ही संबंधित विभागों को जारी की जा चुकी है।
विवरण साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 11,064 क्षेत्रीय कार्य, जिनकी लागत 204 करोड़ रुपये थी, शुरू ही नहीं किए गए थे, जबकि 348 करोड़ रुपये की लागत के 16,834 कार्य लंबे समय से निर्माणाधीन हैं। उन्होंने कहा कि पिछले महीने उपायुक्तों और फील्ड अधिकारियों के साथ हुई बैठक में लंबित योजनाओं को तेज़ी से पूरा करने और समयबद्ध ढंग से विकास कार्यों को पूरा करने के लिए सख्त निर्देश दिए गए थे तथा इसकी रिपोर्ट सीधे उनके कार्यालय को देने के भी निर्देश थे।
उन्होंने कहा कि सघन निगरानी और अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देशों की परिणामस्वरूप अक्तूबर 2025 से 15 जनवरी 2026 के बीच 18,262 कार्य एवं छोटी योजनाएं पूर्ण की गईं, जिससे ग्रामीण लाभान्वित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन कार्यों की प्रगति की निगरानी उच्चतम स्तर पर ‘रियल-टाइम डैशबोर्ड’ के माध्यम से की जा रही है। फील्ड अधिकारियों को दैनिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि निरंतर ट्रैकिंग और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पारदर्शी, आवश्यकता-आधारित और न्यायसंगत विकास को केंद्र में रखकर कार्य कर रही है, ताकि सभी विधानसभा क्षेत्रों में समान रूप से विकास सुनिश्चित किया जा सके। जल शक्ति, लोक निर्माण विभाग, खंड विकास कार्यालय और पंचायतों सहित विभागों व स्थानीय निकायों को निर्देश दिए गए हैं कि जो स्वीकृत कार्य रुके हुए हैं अथवा जिन कार्यों की प्रगति बहुत धीमी है उन्हें तेज़ी से पूरा किया जाए।
सचिव योजना डॉ. अभिषेक जैन ने विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि 11,064 कार्य शुरू नहीं हुए थे, जिनमें से 177 करोड़ रुपये के 9,689 कार्य अक्तूबर 2025 से 15 जनवरी 2026 के बीच तीन महीनों के भीतर पूरे कर दिए गए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से निर्माणाधीन 16,384 कार्यों में से 8,573 कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं, इनकी लागत 159 करोड़ रुपये थी। शेष कार्यों को मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार अगले तीन महीनों में पूरा किए जाने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि जमीनी सत्यापन और तेज़ निष्पादन सुनिश्चित करने के लिए चंबा, कुल्लू और बिलासपुर सहित विभिन्न जिलों में फील्ड विजिट और समीक्षा बैठकें आयोजित की गई हैं। लंबे समय से लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्र भी संबंधित एजेंसियों से प्राप्त कर लिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के तहत सरकार लंबित विकास कार्यों को तेज़ी से पूरा करने, कड़े निगरानी तंत्र और सार्वजनिक धन का सर्वाेत्तम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि विकास का लाभ हर गांव और समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।















