01 अक्तूबर से बनी मिठाइयों पर प्रदर्शित करनी होगी निर्माण और उपयोग की तारीख, आदेश जारी

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DNN सोलन ब्यूरो (आदित्य सोफत)
27 सितंबर। देशभर में बिकने वाले दूध से बने खाद्य प्रदार्थ व खुली मिठाइयों पर निर्माण और उपयोग की तारीख 01 अक्तूबर से लिखना अनिवार्य कर दिया है। मिठाइयों की क्वालिटी में सुधार लाने के लिए सरकार ने नए नियम लागू करने का फैसला किया है। इससे मिठाई की दुकानों में परातों एवं डब्बों  वाली मिठाइयों निर्माण की तारीख  तथा उपयोग की उपयुक्त अवधि जैसी जानकारी प्रदर्शित करनी होगी। मौजूदा समय में, इन विवरणों को पहले से बंद मिठाई के डिब्बे पर उल्लेख करना अनिवार्य है।  एफएसएसएआई यानी भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने नए नियम जारी किए है।
बता दें कि 01 अक्तूबर से जारी होने वक्ले इन नियमों को पहले 01 जून सेर लागु किया जाना था, लेकिन वैश्विक महामारी कोविड-19 के चलते यह नियम 01 जून से प्रभावी नहीं  हो सके। हालांकि अब एफ़एसएसएआई ने इन नियमों को 01 अक्तूबर से लागु करने का फैसला लिया है।  बाजार में बिकने वाली खुली मिठाइयों के इस्तेमाल की समय सीमा अब कारोबारियों को बतानी होगी। कितने समय तक उसका इस्तेमाल ठीक रहेगा उसकी समयसीमा की जानकारी उपभोक्ताओं को देनी होगी। खाद्य नियामक ने इसे अनिवार्य किया है।
वर्तमान में मिठाइयों को बेचने के लिए इस प्रकार के नियम नहीं बनाए गए थे, लेकिन अब इन नियमो को बना दिया है। यदि कोई नियम का पालना नहीं करता है तो उस कारोबारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। साथ ही 2 लाख रुपए तक का जुर्माने का प्रवधान भी नियम में रखा गया है। इस नियम के लागू होने से पहले देशभर में मिठाई कारोबारियों को इस बारे बताया जा रहा है।
मिठाई की दुकान पर अक्सर देखा जाता है कि डिस्प्ले में बहुत सी मिठाईयां बनी होती है। रोशनी में यह मिठाईयां देखने में अच्छी लगती है और यह आकर्षित करती है। आकर्षित करती हुई इन मिठाइयों को देख ग्राहक धोखा जाते है कि यह मिठाई कब बनी होगी औऱ इसके खराब होने का कभी पता नहीं लग पता है। इसी को देखते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण द्वारा नियम बनाए है। इससे ग्राहकों को   मिठाई के बासी होने की चिंता नहीं करनी होगी और लोगों को बेहतर मिठाईयां उपलब्ध होगी।

गौरतलब हो कि  खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग और लेबलिंग) विनियम, 2011 के अनुसार यह नियम पहले सिर्फ पैक्ड मिठाइयों पर ही लागू होता था। हालांकि, अब इस मानदंड को बिना पैक की मिठाइयों के लिए भी अनिवार्य किया जा रहा है | पिछले वर्ष भी एफएसएसएआई ने पारंपरिक भारतीय दूध के उत्पादों पर एक मार्गदर्शन नोट जारी किया था, जिसमें कुछ मिठाइयों की शेल्फ लाइफ को सूचीबद्ध किया गया था।

मिठाइयों की लाइफ शेल्फ तैयार
देश भर में बिकने वाली मिठाइयों की लाइफ शेल्फ तैयार कर ली गई है। इस लाइफ शेल्फ में 1 दिन की समयावधि से लेकर 30 दिन तक कि समयावधि में मिठाइयों को रखा गया हैं कि बनाई गई मिठाई कितने दिन में एक्सपायरी होगी। किसी भी मिठाई की दुकान में कम से कम 200 से ज्यादा मिठाई की वैरायटी होती है। इन मिठाइयों को वेरी शार्ट लाइफ  (जिस दिन निर्माण की गई उसी दिन एक्सपायरी  होना), शार्ट लाइफ (तैयार करने के 2 दिन बाद एक्सपायरी  होना), मीडियम लाइफ ( तैयार करने के 4 दिन बाद  एक्सपायरी  होना), लांग लाइफ (तैयार करने के 7 दिन बाद  एक्सपायरी  होना), वेरी लांग लाइफ (तैयार करने के 30 दिन बाद  एक्सपायरी  होना) श्रेणी बनाई गई है।

एफएसएसएआई द्वारा नए नियमो में दूध से बने खाद्य प्रदार्थ व खुली मिठाइयों पर निर्माण और उपयोग की तारीख लिखना अनिवार्य हो गया है। 01 अक्तूबर से यह नए नियम लागू हो जाएंगे। इसके लिए मिठाई विक्रेताओं को बताया जा रहा है कि कौन सी मिठाई कितने दिन उपयोग उपयुक्त अवधि तक रह सकती है।
-एलडी ठाकुर
सहायक आयुक्त, जिला खाद्य सुरक्षा विभाग, सोलन

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