फूलगोभी की किस्म को राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता

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डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालयनौणी के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित फूलगोभी की एक किस्म को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हुई है। हाल ही में ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट ऑन वेजिटेबल क्रॉप्स (AICRP-VC) के सोलन केंद्र के वैज्ञानिकों ने तेलंगाना स्टेट हॉर्टिकल्चरल यूनिवर्सिटीहैदराबाद में आयोजित AICRP-VC की 44वीं वार्षिक समूह बैठक में भाग लिया। इस बैठक में देशभर के प्रमुख सब्जी वैज्ञानिकों ने भाग लियाजहां चल रहे अनुसंधानों की समीक्षाविभिन्न किस्मों के परीक्षणों का मूल्यांकन तथा भारत में सब्जी उत्पादन और उसकी स्थिरता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण सिफारिशें तैयार की गईं।

विश्वविद्यालय के सोलन केंद्र का प्रतिनिधित्व प्रधान अन्वेषक डॉ. रमेश कुमार भारद्वाज और सह-प्रधान अन्वेषक डॉ. देवेंद्र कुमार मेहता, डॉ. कुलदीप सिंह ठाकुर तथा डॉ. दीपिका शांडिल ने किया।वार्षिक बैठक में किस्म विकासबीज उत्पादन प्रौद्योगिकीफसल संरक्षण तथा टिकाऊ सब्जी उत्पादन से संबंधित विषयों पर गहन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इन विचार-विमर्शों के परिणामस्वरूप सोलन केंद्र से संबंधित आठ प्रमुख सिफारिशें स्वीकृत की गईं। इनमें संभावित सब्जी किस्मों की पहचान एवं रिलीजबीज उत्पादन तकनीकों में सुधार तथा एकीकृत पौध संरक्षण रणनीतियों को अपनाने से जुड़े सुझाव शामिल हैं।

बैठक की एक प्रमुख उपलब्धि नौणी स्थित सब्जी विज्ञान विभाग द्वारा विकसित देरी से तैयार होने वाली फूलगोभी की किस्म ‘सोलन उज्ज्वला (2022/CAULVAR-3)’ को मिली राष्ट्रीय मान्यता रही। इस किस्म को 2022 से 2024 के दौरान AICRP-VC के अंतर्गत विभिन्न स्थानों पर किए गए परीक्षणों में लगातार बेहतर प्रदर्शन के आधार पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली किस्म घोषित किया गया।

उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर इस किस्म को जोन–I (जम्मू-कश्मीरहिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) के लिए अनुशंसित किया गया है। इस किस्म में सफेदसघन और आकर्षक फूल विकसित होते हैंजिनका वजन लगभग 1.0 से 1.5 किलोग्राम होता है तथा इसकी बाजार योग्य उपज क्षमता लगभग 300–350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। यह एक ओपन-पॉलिनेटेड किस्म हैजो महंगे संकर बीजों का किफायती विकल्प प्रदान करती है। इस कारण यह विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए लाभकारी साबित होगी। इसके व्यापक उपयोग से क्षेत्र में देर से तैयार होने वाली फूलगोभी का भरोसेमंद और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन सुनिश्चित होने के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि की संभावना है।

इस किस्म का विकास डॉ. देवेंद्र कुमार मेहताप्रधान वैज्ञानिकसब्जी विज्ञान विभाग द्वारा किया गयाजिसमें डॉ. रमेश कुमार भारद्वाज और डॉ. कुलदीप सिंह ठाकुर का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इसके अलावा डॉ. संदीप कंसल और डॉ. राकेश कुमार ने क्रमशः एकीकृत रोग प्रबंधन (IDM) और एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) परीक्षणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। किस्म की अनुशंसा के अतिरिक्त सोलन केंद्र को बीज संवर्धन तकनीक से संबंधित एक राष्ट्रीय सिफारिश तथा सब्जी फसलों में कीट एवं रोग प्रबंधन से संबंधित छह सिफारिशें भी प्राप्त हुईं। विश्वविद्यालय के लिए एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि यह रही कि डॉ. रमेश कुमार भारद्वाजप्रधान वैज्ञानिक एवं AICRP-VC के प्रधान अन्वेषकको इंडियन सोसाइटी ऑफ वेजिटेबल साइंस (ISVS) का काउंसलर चुना गया। वहीं डॉ. कुलदीप सिंह ठाकुरप्रधान वैज्ञानिकको बीज उत्पादन और टिकाऊ सब्जी उत्पादन तकनीकों के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए ISVS फेलो अवार्ड–2024 से सम्मानित किया गया।

इन उपलब्धियों पर वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है और वैज्ञानिकों के उत्कृष्ट अनुसंधान का परिणाम है। उन्होंने कहा कि ‘सोलन उज्ज्वला’ फूलगोभी किस्म का विकास और अनुशंसा किसान-केन्द्रित कृषि अनुसंधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने जोर दिया कि विश्वविद्यालय नवाचारउच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान और ऐसी प्रौद्योगिकियों के प्रसार के लिए निरंतर प्रयासरत हैजो किसानों की आय बढ़ानेपोषण सुरक्षा मजबूत करने और देश में टिकाऊ बागवानी विकास को प्रोत्साहित करने में सहायक हों।

निदेशक अनुसंधान डॉ. देविना वैद्य ने भी AICRP–वेजिटेबल क्रॉप्स टीम को उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों के समर्पित प्रयासों से विकसित नई किस्में और अनुसंधान कार्य राष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ कर रहे हैं।

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