पुश्तों से रह रहे लोगों से सौतेला व्यवहार

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डीएनएन सोलन
हिमाचल प्रदेश में पुश्तों से रह रहे लोगों के साथ हिमाचल प्रदेश में जमीन खरीदने का कानून धारा 118 सौतेला व्यवहार है। सरकार लोगों से टैक्स वसूल रही है। वोट मांग रही है, लेकिन जब जमीन खरीदने की बात आती है, तो कानून का हवाला दिया जाता है। जोकि पूरी तरह से गलत है। इस कानून में संशोधन करके उन लोगों को जमीन खरीदने में छूट दी जानी चाहिए तो कि 1974 से हिमाचल में बसे है। सोलन में पत्रकार वार्ता के दौरान धारा 118 के खिलाफ बनी गैर कृषक संघर्ष समिति के अध्यक्ष गिरीश साहनी ने यह बात कहीं। उन्होंने कहा कि धारा 118 का सहारा लेकर प्रदेश सरकार उन लोगों के साथ व्यवहार कर रही है, जोकि प्रदेश में 100 सालों से बसे है। उन्होंने कहा कि भाजपा इस कानून में संशोधन कर रही है और कांग्रेस ने बिना यह जाने की भाजपा क्या संशोधन कर रही है विधानसभा से वाकआउट कर डाला। उन्होंने कहा कि धारा 118 कानून को नेता इस लिए खत्म नहीं करना चाहते क्योंकि इससे कइयों की मोटी कमाई होती है।

उन्होंने कहा कि 1972 से लेकर अभी तक हुई 118 की अनुमित के आधार पर जमीनों की खरीद फरोख्त की सीबीआई जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल बाहरी राज्यों के लोग हिमाचल युवतियों के साथ शादी कर लेते हैं। शादी करने के बाद गैर हिमाचलियों को भी कृषि प्रमाण पत्र मिल जाता है और वह हिमाचल में धड़ल्ले से जमीने खरीदनी शुरू कर देते हैं। हैरानी की बात है कि हिमाचल प्रदेश में बीस प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो कि हिमाचली तो हैं, लेकिन कृषक नहीं है। हिमाचल प्रदेश देश का ऐसा राज्य है, जहां पर हिमाचली बनने के लिए बीस वर्ष का इंतजार करना पड़ता है। अमेरिका जैसे विकसित देश में मात्र पांच वर्ष रहने के बाद ग्रीन कार्ड मिल जाता है।

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