ग्रामीण आजीविका केंद्र के माध्यम से महिलाओं को मिलेंगे प्रशिक्षण और रोजगार के नए अवसर, 7 करोड़ की लागत से निर्मित होगा केंद्र- डॉ राम लाल मारकंडा 

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DNN केलांग
14 अगस्त- लाहौल घाटी के उदयपुर में 7 करोड़ रुपए की लागत से ग्रामीण आजीविका केंद्र का निर्माण किया जाएगा। इस ग्रामीण आजीविका केंद्र के शुरू होने से विशेष तौर से महिलाओं को प्रशिक्षण और स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। तकनीकी शिक्षा, जनजातीय  विकास एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ रामलाल मारकंडा ने यह बात आज केलांग में ग्रामीण विकास विभाग के तत्वावधान में आयोजित महिला मंडल प्रोत्साहन पुरस्कार कार्यक्रम के मौके पर बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए अपने संबोधन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि इस केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों के लिए ठहरने और खाने- पीने की भी निशुल्क व्यवस्था रहेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि कौशल विकास निगम के माध्यम से महिला मंडलों को जुराबें, गलीचा और मफलर इत्यादि तैयार करने के लिए और प्रोत्साहित किया जाएगा। तैयार किए गए उत्पादों की मार्केटिंग में भी इन समूहों की मदद की जाएगी। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि महिलाओं को होमस्टे के संचालन को व्यवसायिक आतिथ्य के रूप में प्रशिक्षित करने के लिए भी प्रशिक्षण दिए जाने की कार्य योजना तैयार की गई है ताकि महिलाएं सीधे तौर पर होमस्टे व्यवसाय के साथ जुड़कर अपनी आर्थिकी को और सुदृढ़ कर सकें।
कृषि कार्य में महिलाओं की महत्वपूर्ण सहभागिता की चर्चा करते हुए डॉ रामलाल मारकंडा ने कहा कि यहां की महिलाएं अब शिक्षा के क्षेत्र में भी नए आयाम स्थापित कर रही हैं। कृषि में नई सोच और तकनीक का इस्तेमाल करके लाहौल ने नकदी फसलों के उत्पादन में एक अलग पहचान कायम कर ली है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 और 2002 में घाटी में स्प्रिंकलर सिंचाई योजना और पावर टिलर के उपयोग को ना केवल प्रोत्साहित किया गया बल्कि किसानों को इनका सीधा लाभ भी पहुंचाया गया। अब घाटी में छोटे संपर्क मार्गों के नेटवर्क को विस्तार देने की दिशा में कार्य किया जा रहा है ताकि लोगों को आवागमन की सुविधा तो मिले साथ ही उन्हें अपने कृषि उत्पादों को मंडियों तक पहुंचाने में भी आसानी रहे।
उन्होंने बताया कि पूर्व सरकार के समय कृषि से जुड़ी योजना का लाभ लेने के लिए एक हेक्टेयर भूमि होने की शर्त शामिल कर दी गई थी। इसके चलते लाहौल-स्पीति के अनेक किसान योजना के लाभ से वंचित रहे। उन्होंने कहा की वर्तमान सरकार में जब कृषि मंत्री का दायित्व दिया गया तो इस मुद्दे को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के समक्ष रखा गया। राज्य सरकार ने किसानों की इस समस्या को समझते हुए इस शर्त को हटाया और किसानों को अनुदान का लाभ फिर से मिलना शुरू हुआ।
उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए सरकार द्वारा हर वर्ष समुचित धनराशि आवंटित की जाती है। जनजातीय विकास के लिए जो बजट कभी 27 करोड़ कर दिया गया था उसे अब बढ़ाकर 75 करोड़ कर दिया गया है। इससे जाहिर होता है कि राज्य सरकार जनजातीय विकास के प्रति पूरी तरह से वचनबद्ध है।
डॉ रामलाल मारकंडा ने यह भी कहा कि तांदी से उदयपुर की ओर जाने वाली 49 किलोमीटर सड़क की टारिंग के कार्य को एक साल में पूरा कर दिया गया है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि तांदी से संसारी नाला तक की सड़क को राष्ट्रीय उच्च मार्ग बनाने की मांग केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष रखी गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग बनने के बाद लोगों को आवागमन का एक बेहतरीन साधन मुहैया  होगा। उन्होंने कहा कि मयाड़ घाटी में भी मोबाइल संचार सुविधा स्थापित करने को लेकर प्राथमिकता के आधार पर कार्य किया जा रहा है। उदयपुर क्षेत्र की ओर एयरटेल की ओएफसी केबल बिछाने का कार्य प्रगति पर है।
डॉ रामलाल मारकंडा ने इस मौके पर महिला मंडल प्रोत्साहन पुरस्कार के तौर पर 36 महिला मंडलों को प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान जनजातीय सलाहकार समिति की सदस्य पुष्पा ने भी अपने विचार व्यक्त किए और महिलाओं के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं पर प्रकाश डाला। इससे पूर्व एसडीएम प्रिया नागटा ने  डॉ रामलाल मारकंडा को सम्मानित किया। कार्यक्रम में सहायक आयुक्त डॉ रोहित शर्मा के अलावा पंचायत समिति की पूर्व अध्यक्ष सुनीता और अन्य विभागीय अधिकारी भी मौजूद रहे।

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