केंद्र सरकार के पैसे का न सदुपयोग कर रही और न ही केंद्र को श्रेय दे रही सुक्खू सरकार : जयराम ठाकुर

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शिमला: पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार केंद्र द्वारा प्रदेश को दी जा रही धनराशि का न तो सही इस्तेमाल कर रही है और न ही जनता को यह बता रही है कि विभिन्न योजनाओं के लिए धनराशि केंद्र सरकार उपलब्ध करा रही है। केंद्र की योजनाओं के खत्म होने का समय आ जाता है, लेकिन अनेक परियोजनाओं की प्रगति न के बराबर है। स्वास्थ्य से लेकर अधोसंरचना के क्षेत्र में यही स्थिति है। उन्होंने कहा कि बाह्य सहायता प्राप्त योजनाओं तथा केंद्र प्रायोजित योजनाओं में केंद्र सरकार 90 प्रतिशत तक की हिस्सेदारी दे रही है, लेकिन प्रदेश सरकार कहीं भी केंद्र सरकार का नाम लेना उचित नहीं समझती। आज प्रदेश में 15 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाएं चल रही हैं। सरकार का पूरा ध्यान केवल केंद्र सरकार को कोसने में लगा हुआ है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए भी केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से हिमाचल की लगातार सहायता कर रही है। प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए पीजी की प्रत्येक सीट के बदले केंद्र सरकार हिमाचल को डेढ़ करोड़ रुपये उपलब्ध करा रही है, लेकिन प्रदेश सरकार इस सहयोग का उल्लेख तक नहीं करती। जनता के सामने तथ्यों को रखने के बजाय केंद्र सरकार के योगदान को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश के विकास के लिए सड़क, रेल, शिक्षा, स्वास्थ्य और ऊर्जा क्षेत्र में अभूतपूर्व निवेश किया है। ₹40,000 करोड़ से अधिक की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं, रिकॉर्ड ₹2,911 करोड़ का रेलवे बजट, भारतीय प्रबंधन संस्थान सिरमौर, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान ऊना, स्मार्ट सिटी मिशन, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान बिलासपुर तथा अन्य अनेक विकास परियोजनाएं केंद्र की प्रदेश के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में विफल रही है। स्वास्थ्य क्षेत्र में स्वीकृत कई परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं और 15वें वित्त आयोग के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए स्वीकृत ₹521 करोड़ में से लगभग आधी राशि खर्च नहीं हुई।

जयराम ठाकुर ने कहा कि बल्क ड्रग पार्क के लिए केंद्र सरकार ने ₹1,000 करोड़ की सहायता स्वीकृत की और ₹225 करोड़ जारी किए, लेकिन प्रदेश सरकार केवल ₹102.13 करोड़ ही खर्च कर सकी। वहीं चिकित्सा उपकरण पार्क परियोजना से राज्य सरकार के पीछे हटने के कारण केंद्र सरकार द्वारा जारी ₹30 करोड़ की पहली किस्त वापस करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की लापरवाही और निर्णयहीनता के कारण प्रदेश निवेश, उद्योग और हजारों रोजगार के अवसरों से वंचित रह गया। सुक्खू सरकार को प्रदेश हित को प्राथमिकता देनी चाहिए।

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