छात्रों को मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन का महत्व समझाया

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DNN नौणी

06 दिसम्बर डॉ. यशवंत सिंह परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के विस्तार शिक्षा निदेशालय और कृषि विज्ञान केंद्र, सोलन ने संयुक्त रूप से 5 दिसंबर, 2022 को विश्व मृदा दिवस पर पूरे दिन का कार्यक्रम आयोजित किया।

छात्रों को मिट्टी के नमूने लेने के बारे में व्यावहारिक अनुभव देने के लिए जीपीएस आधारित मिट्टी के नमूने विभिन्न विभागीय अनुसंधान फार्मों, वन भूमि, कृषि वानिकी आधारित प्रणालियों और विश्वविद्यालय के मैदानों से 0 से 15 सेंटीमीटर और 15 से 30 सेंटीमीटर की गहराई से एकत्रित किए गए। यह नमूने विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के स्नातकोत्तर छात्रों और ईएलपी स्नातक छात्रों द्वारा मृदा विज्ञान विभाग के संकाय और छात्रों के सहयोग से किए गए। यह नमूने भौतिक, रासायनिक एवं जैविक विशेषताओं के निर्धारण के लिए विश्वविद्यालय के मृदा, जल एवं पादप विश्लेषण प्रयोगशाला को सौंपे गए।

दोपहर के सत्र में  बागवानी कॉलेज, वानिकी कॉलेज और बागवानी और वानिकी कॉलेज, थुनाग के ईएलपी छात्रों और मृदा विज्ञान संकाय के लिए मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन पर एक व्याख्यान सह बातचीत सत्र का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आईसीएआर के मृदा विज्ञान के पूर्व राष्ट्रीय प्रोफेसर डॉ बिजय सिंह मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता रहे।

निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. इंदर देव ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया और विश्वविद्यालय में विश्व मृदा दिवस और इसके महत्व के बारे में अवगत करवाया। इस अवसर पर  प्रोफेसर सिंह ने मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और जैविक खाद के साथ उर्वरकों के उपयोग के महत्व पर बात की। उन्होंने चावल-गेहूं की फसल और अन्य फसलों में नाइट्रोजन उर्वरक प्रबंधन, मिट्टी के स्वास्थ्य और उत्पादकता को बनाए रखते हुए उर्वरक अनुप्रयोगों के विभिन्न पहलुओं पर भी बात की।

प्रोफेसर सिंह ने छात्रों और फैकल्टी के सवालों का भी जवाब दिया। व्याख्यान के बाद उर्वरकों के उपयोग और मृदा स्वास्थ्य पर उनके प्रभाव पर एक संवाद सत्र आयोजित किया गया। समारोह में विश्वविद्यालय के वैधानिक अधिकारियों, विभागों के प्रमुखों और संकाय ने भाग लिया।

औद्योगिक कृषिवानिकी पर व्याख्यान आयोजित

डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के वानिकी महाविद्यालय द्वारा औद्योगिक कृषि वानिकी पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। प्रसिद्ध कृषि वानिकी वैज्ञानिक और फ़ॉरेस्ट कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, मेट्टुपलयम, तमिलनाडु के डीन डॉ. के टी पार्थिबन इस अवसर पर प्रमुख वक्ता रहे। वानिकी महाविद्यालय के डीन डॉ. सीएल ठाकुर ने डॉ. पार्थिबन का स्वागत किया और कृषि वानिकी के महत्व के बारे में बताया।

वानिकी छात्रों और वैज्ञानिकों की सभा को संबोधित करते हुए डॉ. पार्थिबन ने कहा कि औद्योगिक कृषि वानिकी में पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं प्रदान करने, किसानों को लाभ प्रदान करते हुए वन आधारित उद्योगों को कच्चे माल की स्थायी आपूर्ति करने की क्षमता है। उन्होंने वानिकी के क्षेत्र में हालिया तकनीकी प्रगति जैसे हाई यील्डिंग शॉर्ट रोटेशन क्लोन, उच्च मूल्य वन विकास, मिनी क्लोनल प्रौद्योगिकी, स्मार्ट सिल्वीकल्चर, बहु क्रियाशील कृषि वानिकी, मशीनीकरण और वन वृक्ष आधारित उत्पादों के मूल्यवर्धन पर चर्चा की।

डॉ. पार्थिबन ने शोधकर्ताओं से लकड़ी आधारित उद्योगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक कृषि-वानिकी-आधारित व्यवसाय विकास मॉडल विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने प्रतिभागियों को औद्योगिक कृषि वानिकी संघ के बारे में भी अवगत कराया, जिसमें उद्योग, वैज्ञानिक, उद्यमी, किसान, नर्सरी, आपूर्ति श्रृंखला, वित्तीय संस्थान, बहुराष्ट्रीय कंपनियां और गैर सरकारी संगठन शामिल हैं। व्याख्यान में वानिकी कॉलेज के संकाय, एचओडी और कॉलेज के यूजी और पीजी छात्रों सहित लगभग 500 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

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