क्षेत्रीय अस्पताल सोलन को हुआ इट राइट कैंपस का सर्टिफिकेट जारी 

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DNN सोलन ब्यूरो (आदित्य सोफत)
14 अप्रैल। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन को भारतीय खाद्य संरक्षा व मानक प्राधिकरण द्वारा इट राइट कैम्पस का सर्टिफिकेट जारी किया है। जिला में यह दूसरा सर्टिफिकेट जारी हुए है। इससे पहले जेपी यूनिवर्सिटी को इट राइट कैम्पस का सर्टिफिकेट जारी हुआ है। जिला खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा ऑडिट रिपोर्ट सौंपने के बाद यह सर्टिफिकेट एफएसएसएआई ने क्षेत्रीय अस्पताल को दिया है। अस्पताल में पौष्टिक व बेहतर तरीके से खाना बनाया जाए इसके लिए कर्मियों को ट्रेनिंग भी करवाई गई है।
जानकारी के अनुसार जिला में इन दिनों कई सरकारी, गैर सरकारी को एफएसएसएआई द्वारा इट राइट कैम्पस व मंदिरों को भोग योजना के तहत सर्टिफिकेट जारी किया जा रहा है। इस सर्टिफिकेट को जारी करने से विभाग की ओर से जारी नियमों के अनुसार प्रक्रिया पूरी की जाती है और फाइनल ऑडिट के बाद अंक भी दिए जाते है। सोलन जिला से इट राइट कैम्पस के लिए क्षेत्रीय अस्पताल को चुना गया था। इसके पश्चात यहां पर विभाग की ओर से खाना बनाने से लेकर अन्य सभी प्रकार की प्रक्रिया को करवाया गया।
गौरतलब हो कि अस्पताल में मरीजों के लिए खाना बनाया जाता है।  इसकी गुणवत्ता को ओर बेहतर बनाने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा इट राइट कैंपस के तहत ट्रेनिंग करवाई गई है। इस ट्रेनिंग के तहत कर्मियों को खाना बनाने से लेकर वितरण तक की विधि को बताया गया है। ट्रेनिंग के पश्चात विभाग ने अस्पताल का प्री-ऑडिट करवाया था  इस प्रक्रिया से गुजरने के बाद विभाग द्वारा हाल ही में ऑडिट हुआ।
क्या होता है ऑडिट में 
खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा हाल में क्षेत्रीय अस्पताल सोलन का ऑडिट करवाया है। इस ऑडिट के दौरान हर एक पहलू को देखा जाता है, जिससे कि यह पता चल पता है कि क्या वास्तव में ट्रेनिंग में बताए गए नियमों के अनुसार कार्य हो रहा है या नहीं। इसके बाद ऑडिट के दौरान अंक दिए जाते है।  यह एक फाइनल परीक्षा की तरह होता है। इसके बाद पूरी जानकारी को एफ़एसएसएआई को भेजी जाती है और वहीं से इट राइट कैम्पस का सर्टिफिकेट जारी किया जाता है।
क्या कहना है खाद्य सुरक्षा अधिकारी का 
खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनुज शर्मा ने बताया कि क्षेत्रीय अस्पताल सोलन को इट राइट कैंपस का सर्टिफिकेट जारी किया गया है। इससे पहले जेपी यूनिवर्सिटी को यह सर्टिफिकेट जारी हुआ था। इसके बाद सोलन के क्षेत्रीय अस्पताल को चुना गया और यहां पर ट्रेनिंग के बाद ऑडिट करवाया गया।  फाइनल ऑडिट के बाद यह सर्टिफिकर्त जारी किया गया है।

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