DNN शिमला
28 सितंबर। राजधानी शिमला में कूड़े और पानी के भारी भरकम बिलों को लेकर शिमला नागरिक सभा ने नगर निगम शिमला के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सभा ने डीसी ऑफिस के बाहर प्रदर्शन कर नगर निगम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सभा ने मांग की है कि नगर निगम शिमला की मासिक बैठक है, तो मासिक बैठक में कूड़े, पानी और प्रॉपर्टी टैक्स के बिलों में शहरवासियों को राहत नहीं मिली, तो आगामी 13 अक्टूबर को 24 घंटे का महाधरना निगम कार्यालय के बाहर किया जाएगा। सभा के अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने मांग कि है कि निगम से कोरोना काल के दौरान जारी किए पानी और कूड़े के बिलों को माफ करे।
नागरिक सभा का आरोप है कि नगर निगम शिमला ने ऐसे समय मे कूड़े और पानी के बिल जारी किए हैं जब पूरे विश्व मे महामारी फैली हुई है। कोरोना काल मे जहां 70 प्रतिशत जनता बेरोजगार हुई है वहीं नगर निगम ने 10 फीसदी बढ़ौतरी के साथ पांच पांच माह के बिल एक साथ जारी कर दिए है जिससे शहरवासियों पर बेरोजगारी के साथ साथ आर्थिक मंदी का बोझ पड़ा है। सभा ने नगर निगम शिमला से मार्च से अगस्त 2020 तक के कूड़े व पानी के बिलों को पूरी तरह माफ करने की मांग की है। उन्होंने शिमला शहर की जनता से भी अपील की है कि वह कोरोना काल के कूड़े व पानी के बिलों व उस से पहले के बकाया बिलों का भुगतान न करे। उन्होंने कहा है कि नगर निगम शिमला जनता पर हजारों रुपये के भारी बिलों को जमा करने के लिए अनचाहा दबाव बना रहा है, जिसे कतई मंज़ूर नहीं किया जाएगा। उन्होंने जनता से इन बिलों का बहिष्कार करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि यदि एमसी कारोबारियों को प्रॉपर्टी टैक्स ,पानी और कूड़े के बिलों में रियायत देती है तो शहर के अन्य लोगों को भी राहत मिलनी चाहिए।















