वेस्ट से वेल्थ’- सुखाए गए फूल से किसानों को आय अर्जित करने के लिए प्रशिक्षित कर रहा नौणी विवि

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DNN नौणी

24 दिसम्बर डॉ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय,नौणी  के पुष्प एवं स्थल वा प्रारूपीकरण विभाग में सुखाए गए फूलों एवं मूल्यवर्धित वस्तुओं पर दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण नाबार्ड द्वारा वित्त पोषित परियोजना- सूखे फूलों के मूल्यवर्धन पर प्रौद्योगिकी को लोकप्रिय बनाना और मार्केट से लिंक करना के तहत आयोजित की गई।

परियोजना की मुख्य अन्वेषक डॉ भारती कश्यप ने बताया कि विभाग कई वर्षों से शुष्क पुष्प उत्पादन पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करता आ रहा है। इस परियोजना के माध्यम से विश्वविद्यालय में ही प्रशिक्षणार्थियों के लिए एक सेल एवं सुविधा केंद्र खोला गया जिसमें किसानों द्वारा बनाई गई सुखाए फूलों की मूल्य वर्धित वस्तुओं को बेचा जा सके। इन वस्तुओं को कई टूरिज्म होटलों, फूल की दुकानों एवं पुष्प प्रदर्शनियों के माध्यम से भी बेचा गया। इसी क्रम में सोलन और सिरमौर जिला के 25 किसानों के लिए यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान विश्वविद्यालय के निदेशक अनुसंधान डॉ संजीव चौहान एवं अधिष्ठाता औद्यानिकी महाविद्यालय डॉ मनीष कुमार मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित रहे। डॉ चौहान ने सुखाए गए पुष्पों के महत्व पर प्रकाश तथा प्रशिक्षणार्थियों को सर्टिफिकेट बांटे।

ज्ञात रहे कि पूर्व में भी सुखाए गए फूलों की तकनीक से जुड़कर कई महिलाएं अपना रोजगार कमा रही हैं। विश्वविद्यालय सूखे फूलों के मूल्यवर्धन पर 28 प्रशिक्षण शिविर में 400 से अधिक किसानों को प्रशिक्षित कर चुका है। इनमें से बिमला देवी का नाम उल्लेखनीय है जिन्होंने खाद्यान्न फसलों के अवशेषों से ड्राई फ्लावर’ बनाने का काम शुरू किया एवं अब ‘एवरलास्टिंग’ नाम से सुखाए गए फूलों की एक अपनी कंपनी चला रही हैं।

डॉ भारती ने बताया कि हमारे चारों ओर कई प्रकार की घास, शंकु, फर्न तथा खाद्यान्न फसलों के अवशेष पाए जाते हैं जिन्हें हम व्यर्थ या’ वेस्ट’ समझते हैं। इन्हें उचित तकनीकों द्वारा सुखा कर एवं प्रसंस्कृत कर कई वस्तुएं जैसे ड्राई फ्लावर स्टिक, पॉट-पॉरी, वॉल पिक्चर पुष्प सुसज्जित टोकरियां, राखियां इत्यादि बनाई जा सकती हैं जिनकी न केवल देश बल्कि विदेशों में भी मांग है। भारत से कुल पुष्प निर्यात का लगभग 70% शुष्क पुष्पों द्वारा ही होता है।

मक्की, बाजरा, ज्वार, प्याज, अलसी, लीक, नारियल, बिल फल जैसी फसलों के अवशेष से कई सजावटी वस्तुएं तैयार की जाती हैं। विभाग द्वारा ‘फ्लोरल क्राफ्ट लैब में ये सभी वस्तुएं दर्शकों के प्रदर्शनार्थ रखी गई हैं। इसी तरह विभाग के पास व्यर्थ फूलों से तैयार की गई अगरबत्ती तथा हर्बल गुलाल बनाने की भी तकनीक है जो फूलों को व्यर्थ होने से बचाती हैं बल्कि मंडी में फूल की मांगें न होने पर फूलों के उपयोग की राह बनाने के साथ-साथ आमदनी बढ़ाने का भी मार्ग प्रशस्त करती हैं।

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