DNN अर्की (शहनाज़)
उपमंडल की दूरदराज की ग्राम पंचायत सारमा के गाँव वाड़ाघाट व डोरा देश की आज़ादी के 73 साल बाद भी सड़क सुविधा से वंचित हैं । इन गाँव की आबादी 110 के क़रीब है । लोगों को गांव में अपने घर जाने के लिए दुर्गम जंगल पार करके जाना पड़ता है जहां उन्हें जंगली जानवरों का भय रहता है । जंगल में बसे होने के कारण इन गावो को हर साल इन जंगलों में लगने वाली भयानक आग के कारण फसलों व पशुओं से हाथ धोना पड़ता है । जंगल क़रीब 10 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है,जिससे गाँव के लोगों की फसलों को तो नुक़सान होता है व पशुओं को भी नुक़सान होता है । गत साल भी गाँव की एक महिला जँगल में लगी आग के कारण आग से झुलस गईं थी । साथ ही कई पशु भी आग से झुलस गए थे । यदि गाँव में कोई बीमार हो जाता है तो उस को पीठ पर उठा कर .या चारपाई पर उठा कर अस्पताल ले जाना पड़ता है । ग्राम निवासियों सीनू राम ठाकुर,बलदेव ठाकुर,हरि राम,मीना देवी व नरेंद्र ठाकुर ने बताया कि आज तक गाँव के लिए रास्ता तक नहीं है । पंचायत भी कोई ध्यान नहीं देती । इन लोगों का कहना है की पिछले साल भी गाँव में भयानक आग लगी थी परन्तु सरकार व प्रशासन ने कोई मदद नहीं की न ही कोई पूछने के लिए गाँव में आये । नरेंद्र ठाकुर ने बतलाया कि यदि सरकार गाँव तक सड़क नहीं निकाल सकती तो सड़क के किनारे कहीं पर भी ज़मीन के बदले ज़मीन देने की कृपा करें ताकि ग्राम वासी बाक़ी बची ज़िंदगी को सही तरीक़े से जी सकें । सरकार चाहे तो गाँव तक एम्बुलेंस रोड निकाल सकती है व वन बिभाग भी गाँव तक फ़ायर सेफ़्टी रोड व पैट्रोलिग रोड भी बना सकता हैं । जिससे गाँव के लोगों को सुविधा मिलेगी ,वहीं पर जंगलों को आग से बचाने में भी मदद मिलेगी । इन लोगों ने सरकार से मांग की है कि गांव के लिए शीघ्र ही सड़क का निर्माण किया जाए ताकि ग्राम वासी आम ज़िन्दगी जी सकें ।















