DNN कांगड़ा
जहां रोज कमा कर खाना ही नियति हो अगर वहां कई दिनों के लिए काम ही न मिले तो चार से पांच लोगों के गरीब परिवार की क्या हालत होगी ऐसे गरीब तथा निर्धन परिवारों की चिंता करते हुए प्रदेश सरकार ने लॉकडाउन-दो में ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के कार्यों को शुरू करवाकर रोजगार और विकास के दोनों पहलुओं को साकार करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। प्रदेश में कोरोना पॉजिटिव का पहला मामला कांगड़ा जिला में ही सामने आया था जिसके चलते जिलाभर में लॉकडाउन किया गया तथा इसमें सभी तरह के कार्यों पर भी पूर्णतयः रोक लगाई गई लेकिन 20 अप्रैल से कांगड़ा जिला में मनरेगा गतिविधियां आरंभ करने का निर्णय लिया गया।
लॉकडाउन-2 में सरकार के इस निर्णय से कांगड़ा जिला के रिहालपुर के राकेश कुमार, मंडप के राजेश सहित 9548 निर्धन लोगों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है। इसमें 45 दिव्यांग भी लाभांवित हुए हैं। कांगड़ा जिला में मनरेगा के तहत 6640 मस्ट्राल जारी किए गए हैं इनमें से 1531 मस्ट्रालं के तहत एक माह के भीतर ही दो करोड़ 17 लाख की मजदूरी का भुगतान आनलाइन भी हो चुका है।
रिहालपुर के मनरेगा कार्ड धारक राकेश कुमार ने सरकार और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लॉकडाउन प्रथम चरण में मनरेगा सहित अन्य सभी कार्य बंद हो गए थे तथा उनको धर्मपत्नी सहित तीन बेटियों के लिए रोजी रोटी जुटाने की चिंता सता रही थी। राकेश कुमार ने कहा कि लॉकडाउन से पहले कभी मनरेगा तो कभी सब्जी मंडी कांगड़ा में दिहाड़ी लगाकर परिवार का पालन पोषण कर रहे थे, करीब एक माह तक बिना मजदूरी के परिवार की रोजी रोटी के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी
उन्होंनें कहा कि लॉकडाउन-दो में सरकार ने 20 अप्रैल से मनरेगा के कार्यों को आरंभ किया जिसमें उनको भी अपनी पंचायत में कार्य करने का अवसर मिला तथा मजदूरी की पहली किश्त भी उनको मिल आनलाइन मिल चुकी है और अब परिवार की रोजी रोजी की चिंता भी खत्म हो गई है। इसी तरह से मंडप के राकेश कुमार, सुलह के संजय कुमार, निशा देवी, लेख राज ने भी मनरेगा के कार्य आरंभ करने पर सरकार तथा जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनको अब मनरेगा से दिहाड़ी मिलने पर अपने परिवार की रोजी रोटी चलाने में आसानी हो गई है।
कांगड़ा जिला में 20 अप्रैल से मनरेगा कार्य आरंभ हुए हैं, जिला में 3084 विकास कार्य विभिन्न पंचायतों में चल रहे हैं इस पर 25 करोड़ रूपये व्यय किए जा रहे हैं, 84266 कार्य दिवस सृजित किए गए हैं जिला में 20 अप्रैल के बाद 6640 कुल मस्ट्रॉल जारी किए गए हैं जबकि 1531 मस्ट्रोल के तहत दो करोड़ 17 लाख की मजदूरी की पहली किश्त आनलाइन खातों में डाल दी गई है तथा निर्माण कार्यों पर दस करोड़ 98 लाख की राशि भी व्यय की जा चुकी है।















