DNN कुल्लू ब्यूरो
07 नवम्बर। राष्ट्रीय आजीविका मिशन का कुल्लू जिला में प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। महिलाओं को आत्मनिर्भर व सशक्त बनाने के लिए विभिन्न स्वयं सहायता समूहों का गठन करके सुलभ ऋण सुविधा प्रदान की जा रही है। यह बात उपायुक्त डाॅ. ऋचा वर्मा ने जिला के स्वयं सहायता समूहों से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि जिला के विभिन्न स्वयं सहायता समूहों को आजीविका मिशन के अंतर्गत आत्मनिर्भर बनने से संबंधित विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण प्रदान किए गए हैं। महिलाओं को पेंटिंग, सिलाई-कढ़ाई, बैग बनाना, खड्डी में बुनाई करना जैसे अनेक क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जा रहा है जहां महिलाएं अपनी आजीविका अर्जित कर सके और आत्मनिर्भर बन सके। उन्होंने कहा कि खड्डी से शाॅल, पट्टी, दोहडू इत्यादि की बुनाई में जिला की महिलाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं।
डाॅ. ऋचा वर्मा ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को संबंधित विभाग द्वारा उन्हें आजीविका अर्जन से जुड़े व्यवसाय करने के लिए ऋण प्रदान करवाए जा रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों को उनके द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को बेचने की सुविधा प्रदान करने के लिए उन्हें बड़े मेलों में निःशुल्क बिक्री स्टाॅल प्रदान किए जा रहे हैं। स्थानीय उत्पादों के प्रचार-प्रसार व बिक्री के लिए अलग से भी विशेष मेलों का आयोजन किया जाता है। कुल्लू के स्वयं सहायता समूह अब स्वच्छ भारत मिशन तथा राष्ट्रीय आजीविका मिशन के अंतर्गत गौ के गोबर से विभिन्न प्रकार के उत्पाद बना रहे हैं। त्यौहारी सीजन में अब महिलाएं गौ के गोबर से औषधीय गुणों से युक्त दीये, खुश्बूदार धूप तथा अन्य उत्पादों का निर्माण करने में जुटी हैं। इसके लिए जिला ग्रामीण विकास अभिकरण द्वारा महिलाओं को बाकायदा प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। डाॅ. ऋचा वर्मा ने कहा कि इस बार कुल्लू जिला के लोगों की दीपावली ईको फ्रैंडली होगी और प्रयास रहेगा कि अधिक से अधिक घरों तक स्थानीय महिलाओं द्वारा तैयार किए गए दीपक, धूप पहुंचे जिसका वे त्यौहारों में प्रयोग कर सकें।
उपायुक्त ने कहा कि गौ के गोबर से इस प्रकार के उत्पाद तैयार करना खर्चीला भी नहीं है। इसके लिए सांचा, चावल का आटा तथा मुल्तानी मिट्टी की आवश्यकता पड़ती है। गौ गोबर से निर्मित दीये तथा धूप विल्कुल शुद्ध तथा पर्यावरण अनुकूल है। इसका एक से अधिक बार उपयोग किया जा सकता है। उपयोग करने के उपरांत इसकी सामग्री को खेतों में डाला जा सकता है जहां ये मिट्टी में मिलकर जैविक खाद का काम करती है।
डाॅ. ऋचा वर्मा ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों द्वारा गौ के गोबर से निर्मित उत्पादों को रविवार को किन्जा में आयोजित किए जा रहे जनमंच में प्रदर्शित किया जाएगा। इन उत्पादों का जिलाभर में व्यापक प्रचार व प्रसार किया जा रहा है ताकि लोग आगामी त्यौहारों के दौरान स्थानीय महिलाओं द्वारा तैयार बहुउपयोगी उत्पादों को खरीदें। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों की अधिक से अधिक महिलाओं को इस कार्य को करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है और चरणवद्ध तरीके से प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है।
शिक्षा मंत्री ने की जिला में इस पहल की सराहना
शिक्षा व कला, भाषा एवं संस्कृति मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने जिला में गाय के गोबर से निर्मित किए जा रहे उत्पादों की इस पहल के लिए जिला प्रशासन के प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि गोबर से तैयार किए जा रहे ये उत्पाद पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त हैं और काफी सस्ते भी हैं। उन्होंने कहा कि इस पहल से जिला में राष्ट्रीय आजीविका मिशन और स्वच्छ भारत मिशन को बल मिलेगा। महिलाओं की आजीविका बढ़ेगी और वे आत्मनिर्भर भारत का हिस्सा बनेंगी। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के लिए अनेक प्रकार के ऐसे उद्यम हैं जहां वे ऋण लेकर संयुक्त रूप से निजी कारोबार शुरू करके अपनी आर्थिकी को संबल दे सकती हैं।
गऊ गोबर से निर्मित दीये व धूप का उपयोग करने की अपील
डाॅ. ऋचा वर्मा ने जिलावासियों से आगामी त्यौहारों के दौरान गौ गोबर से निर्मित दीये व धूप का प्रयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ये उत्पाद पर्यावरण मित्र हैं और सबसे बड़ी बात है कि स्थानीय महिलाओं द्वारा तैयार किए गए हैं। इनकी कीमत भी काफी कम है और लोग आसानी से खरीद सकते हैं। वीडियो कान्फ्रेंसिंग के दौरान उपायुक्त ने महिलाओं व युवकों से कोरोना संक्रमण को समाप्त करने के लिए कोविड के नियमों की इमानदारी के साथ अनुपालना करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि फेस कवर को अच्छे से उपयोग तथा दो गज की दूरी वायरस से बचाव के लिए जरूरी है। प्रत्येक व्यक्ति को कोविड के प्रोटोकोल की अनुपालना करनी होगी।















