DNNनौणी
31 दिसंबर डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में बागवानी और वन फसलों में हालिया तकनीकी प्रगति पर सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुक्रवार शाम को संपन्न हुआ। प्रशिक्षण का आयोजन विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग द्वारा परिष्कृत विश्लेषणात्मक उपकरण सुविधा, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के सहयोग से स्तुति कार्यक्रम के तत्वावधान में किया गया।
प्रशिक्षण में मिजोरम, तेलंगाना, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के फैकल्टी, प्रोजेक्ट फेलो, पीएचडी स्कॉलर्स और उद्यमियों सहित 30 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागी वानिकी, बागवानी, जैव रसायन, वनस्पति विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान, कीट विज्ञान, फल विज्ञान, वन आनुवंशिकी, आनुवंशिकी और पादप प्रजनन, भूविज्ञान, सूक्ष्म जीव विज्ञान, पादप रोग विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, सिल्वीकल्चर और कृषि वानिकी और जैव प्रौद्योगिकी जैसे विभिन्न विषयों से थे।
समापन सत्र में कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने प्रशिक्षुओं से कहा कि वे अपने शोध को उत्पादक मुद्दों से जोड़ने की दिशा में काम करें। उन्होंने कहा कि हमें कई प्रजातियों को लुप्तप्राय सूची से बाहर लाने में मदद करने के लिए विश्लेषणात्मक तकनीकों का उपयोग करने के प्रयास करने चाहिए। प्रो. चंदेल ने विश्वविद्यालयों के बुनियादी अनुसंधान ढांचे के आधुनिकीकरण में डीएसटी की भूमिका की भी सराहना की।
बायोटेक्नोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रजनीश शर्मा ने बताया कि प्रशिक्षुओं के लिए 14 विशेषज्ञ व्याख्यान के माध्यम से जननद्रव्य लक्षण वर्णन, पौधों के आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण और उपयोग और व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इस अवसर पर अनुसंधान निदेशक डॉ. संजीव चौहान ने भारतीय कृषि की प्रगति और इसकी वर्तमान चुनौतियों पर भी बात की।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विभिन्न हालिया दृष्टिकोणों पर केंद्रित था जिनका उपयोग बागवानी और वन फसलों में किया जा रहा है। इस अवसर पर उद्यानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. मनीष शर्मा, वानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. सीएल ठाकुर, जैव प्रौद्योगिकी विभाग और स्तुति के संकाय सदस्य भी उपस्थित थे। प्रशिक्षण के दौरान एक संग्रह का विमोचन भी किया गया। प्रोफेसर चंदेल ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए।