DNN शिमला (श्वेता)
हिमाचल प्रदेश के 2 विश्वविद्यालयों द्वारा पिछले कुछ वर्षों में 5 लाख से ज्यादा फर्जी डिग्रियां बांटने का मामला सामने आने के बाद छात्र संगठन एनएसयूआई ने प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए है। एनएसयूआई पूरे मामले में सरकार के नजदीकियों की मिलीभक्त की आशंका जताई है। साथ ही प्रदेश सरकार से निजी विश्वविद्यालय शिक्षा विनियामक आयोग के अधिकारियों के खिलाफ भी कार्यवाही की मांग की है।
एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अगर जल्द ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो एनएसयूआई प्रदेश भर के महाविद्यालयों में जबरदस्त प्रदर्शन करेगी और जरूरत पडऩे पर प्रदेश सचिवालय व मुख्यमंत्री का घेराव किया जाएगा।
एनएसयूआई के प्रदेशाध्यक्ष छत्तर ठाकुर ने यह चेतावनी देते हुए कहा कि यूजीसी ने प्रदेश सरकार को पहले ही पत्र लिख कर सोलन व शिमला के विश्वविद्यालय द्वारा पिछले करीब 7-8 वर्षों में 5 लाख से भी अधिक फर्जी डिग्रियां बनाकर बेचने के बारे में सूचित कर दिया था। इसके बावजूद भी सरकार ने कोई कड़ा कदम नहीं उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे घोटाले में सरकार के नज़दीकी लोग संलिप्त हो सकते है। छत्तर ठाकुर ने कहा कि 2012 से पूर्व प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा एनएसयूआई के लाख विरोध के बावजूद भी राज्य में अंधाधुंध निजी विश्वविद्यालय खोले गए थे। कुल 18 निजी विश्वविद्यालयों में से 8 तो जिला सोलन में ही दी गई। ठाकुर ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द इन दोनों निजी विश्वविद्यालयों की मान्यता रद्द कर दी जाए और इस घोटाले में जो भी लोग शामिल है उन्हें जल्द से जल्द सलाखों के पीछे डाला जाए। प्रदेश संगठन महासचिव मनोज चौहान ने कहा कि एनएसयूआई इन्ही फर्जीवाड़ों की आशंका के चलते शुरू से ही शिक्षा के निजीकरण के विरुद्ध आवाज उठती आ रही है। इस फर्जीवाड़े ने देशभर में देवभूमि को शर्मसार कर दिया। मनोज चौहान ने प्रदेश सरकार से निजी विश्वविद्यालय शिक्षा विनियामक आयोग के अधिकारियों पर भी कार्यवाही की मांग की। एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अगर जल्द ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो एनएसयूआई प्रदेश भर के महाविद्यालयों में जबरदस्त प्रदर्शन करेगी और जरूरत पडऩे पर प्रदेश सचिवालय व मुख्यमंत्री का घेराव किया जाएगा।















