नगर निगम बनाने को लेकर समिल्लित होने वाली प्रस्तावित आठ पंचायतों ने  किया विरोध, कहा केवल नप वार्डों की ओर ही दें ध्यान 

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DNN सोलन ब्यूरो  
14 अगस्त। नगर परिषद सोलन को नगर निगम बनाने को लेकर समिल्लित होने वाली अधिकतर पंचायतों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। इसको लेकर हुई पंचायत प्रतिनिधियों की एक बैठक में खासा रोष देखने को मिला है। साथ ही पंचायत प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को उपायुक्त सोलन के माध्यम से ज्ञापन भी सौंपा है। इस ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से पंचायत प्रतिनिधियों ने मांग कि की पंचायतों को नगर निगम  सम्मिलित न किया जाए, केवल नप के तहत आने वाले वार्डों की ओर ही ध्यान दिया जाए।

बता दें कि सोलन नगर परिषद को नगर निगम बनाने को लेकर शहर में हलचल शुरू हो गई है।   इसको लेकर आसपास की पंचायतों को भी सम्मिलित किया जाना है। जैसे ही पंचायत प्रतिनिधियों को इसका पता चला तो उन्होंने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि इसको लेकर प्रस्तावित आठ पंचायतों जिनमे कोठों, शामती, सेरी, सलोगड़ा, पड़ग, सपरून,  आंजी,  बसाल की पंचायतों को नगर निगम बनाने के लिए शमिल किया जाना है, लेकिन लोगों में लेकर इसको लेकर काफी रोष है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि वह सोलन शहर को नगर निगम बनाने के विरोध में नहीं है लेकिन इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों को इसमें शामिल सही नहीं है।पंचायत प्रतिनिधियों का यह भी कहना है कि नगर निगम के लिए आवश्यक आबादी की शर्त को अब शहर पूरा कर रहा है। 2011 की जनगणना के अनुसार भले ही शहर की आबादी कम थी लेकिन अब 2021 में नई जनगणना होनी है। अब शहर की आबादी ही 50 हजार से अधिक हो गई है। इसलिए शहर के ही 15 वार्डों के आधार पर ही नगर निगम बनान चाहिए। इन पंचायत प्रतिनिधियों का यह भी कहना है कि नगर निगम बनने के बाद ग्रामीण सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से वंचित हो जाएंगे। इसके अलावा गरीब लोगों पर भारी भरकम टैक्स थोपे जाएंगे।क्या कहना है पंचायत प्रतिनधियों का

ग्राम पंचायत पडग़, प्रधान जगदीश वर्मा का कहना है कि हम सोलन को नगर निगम के विरोध में नहीं है लेकिन आठ  पंचायतों को नगर  निगम में शमिल करने के विरोध में है। प्रशासन ने हमें विश्वास में लिए बिना ही पंचायतों को शहर में मिलाने की योजना बनाई है। इसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों के रहने वाले लोगों को अपने प्रमाण पत्रों के लिए भटकना पड़ेगा। विभिन्न योजनाओं पर मिलने वाली सब्सिडी बंद हो जाएगी। गांव की गरीब जनता पर भारी भरकम टैक्स का बोझ पड़ेगा। शहर की आबादी वर्ष 2011 की तुलना में कई गुणा बढ़ गई है। इसलिए शहर के आधार पर ही सोलन को  नगर निगम बनाया जाए।

करुणा शर्मा, प्रधान, ग्राम पंचायत सलोगड़ा  का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 80 से 90 फीसदी आबादी कृषि पर ही निर्भर है। लोग खेती बाड़ी करते हैं। नगर निगम बनने से लोग ग्रामीण क्षेत्रों में मिलने वाली सभी सुविधाओं से वंचित हो जाएगा। इसके अलावा लोगों को मनरेगा का लाभ भी नहीं मिलेगा, जिसके माध्यम से ग्रामीण लोगों को घर द्वार पर रोजगार मिल रहा है।मीना सिंह, उपप्रधान, ग्राम पंचायत सपरून  का कहना है कि सोलन को नगर निगम बनाने के विरोध में नहीं है लेकिन इसके लिए स्थानीय लोगों को भी विश्वास में लिया जाना चाहिए। ग्राम पंचायत में आम सभा आयोजित होनी चाहिए। यदि ग्राम सभा नगर निगम में शामिल करने के लिए सहमत है तो उन्हें भी ऐतराज नहीं है लेकिन वर्तमान में है।

एडवोकेट मनोज वर्मा, निवासी कोठो पंचायत का कहना है कि शहर के विकास के लिए नगर निगम बनाने का कोई विरोध नहीं है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों को शहर में मिलाने का वे विरोध करते रहे है और आगे भी करेंगे। आज से 5 से 7 वर्ष पहले भी यह मुहिम चली तब भी उनके विरोध के कारण ही सरकार ने इसे स्थगित किया था। ग्रामीण क्षेत्रों का अभी कोई शहरीकरण नहीं हुआ है। लोगों को कई योजनाओं से वंचित होना पड़ेगा। इससे उन्हें फायदा होने के स्थान पर नुकसान ही होगा।

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