कोविड-19 के दौर में डाॅक्टरों की भूमिका सराहनीय

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DNN कुल्लू

9 दिसम्बर। शिक्षा व कला, भाषा एवं संस्कृति मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि कोरोना वायरस दुनिया के लिए अभी तक पहली बना हुआ है। वायरस ने जैसे ही देश व प्रदेश में दस्तक दी, चिकित्सा जगत में भी मानो खलबली सी मच गई। डाॅक्टरों को भी आरंभ में समझ नहीं आया कि स्थिति पर कैसे नियंत्रण पाया जाए। उन्होंने कहा कि कुल्लू जिला में चिकित्सकों ने जिस प्रकार से अपने कर्तव्य का निर्वहन किया है, वह सराहनीय है। जिला में कोरोना संक्रमण काफी देरी से आया और यहां के डाॅक्टर इससे निपटने के लिए विल्कुल तैयार थे। गोविंद ठाकुर देर सायं क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में चिकित्सकों के साथ कोरोनामुक्त समाज के लिए किऐ जाने वाले प्रयासों पर चर्चा कर रहे थे।
गोविंद ठाकुर ने कहा कि वह स्वयं पाॅजिटिव रहे और काफी दिनों बाद अस्पताल में चिकित्सकों के साथ संवाद कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में डाक्टरों की भूमिका की सभी को सराहना करनी चाहिए। इन्होंने अपने पूरे समर्पण और सामथ्र्य के साथ मरीजों की सेवा की है। मरीज को बचाने के लिए अपनी जान की भी परवाह नहीं की। यही कारण रहा कि अस्पताल में 57 डाॅक्टर व पैरा मैडिक्स पाॅजिटिव आ चुके हैं। चिकित्सकों ने कोरोना काल में विपरीत परिस्थितियों में उत्साहपूर्वक काम करते हुए दूसरे लोगों की भी हिम्मत बढ़ाई है। आधी रात को भी लोगों ने फोन करके डाॅक्टर को अपने घर में इलाज के लिए बुलाया। यह इतना कठिन कार्य है जिसे समझने की आवश्यकता है। अपनी डियूटि करते हुए पाॅजिटिव होना चिकित्सकों के लिए स्वाभाविक था।
डाॅक्टर कोविड मरीजों से रोज करें बात
शिक्षा मंत्री ने डाॅक्टरों से कहा कि वे आईसोलेशन में रह-रहे कोरोना मरीजों के साथ बात करें। इससे जहां उनका हौंसला और मनोबल बढ़ेगा, वहीं मरीज व परिजनों की कौंसलिंग भी हो जाएगी। लोग डाॅ. की बात पर भरोसा करते हैं। उन्होंने कहा कि नेरचैक में चिकित्सक अच्छा कार्य कर रहे हैं, लेकिन समाज के कुछ लोग नकारात्मकता फैलाने का कार्य करने से नहीं चूकते जो अच्छी बात नहीं है।
गोविंद ठाकुर ने चिकित्सकों से कहा कि वे कोरोना मरीजों के उपचार पर अपने अनुभव सोशल मीडिया में शेयर करें ताकि अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे और लोगों के मन से अनावश्यक भ्रांतियां दूर हो। उन्होंने कहा कि कुछ डाक्टर जो कुल्लू जिला से संबंध रखते हैं वे स्थानीय बोली में सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों में जागरूकता उत्पन्न करें और महामारी के प्रति उनके सजग करें।

प्रदेश का श्रेष्ठ कोविड केयर सेंटर बनेगा कुल्लू अस्पताल
गोविंद ठाकुर ने कहा कि क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में विकसित किए जा रहे 100 बिस्तरों के कोविड केन्द्र में सभी अत्याधुनिक सुविधाएं मुहैया की जा रही है। सभी बिस्तरों के साथ आॅक्सीमीटर लगे हैं। शौचालयों की बेहतर सुविधा के अलावा गर्म पानी की व्यवस्था सभी कुछ उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि अस्पताल में डाॅक्टर काफी समर्पित हैं जो कोरोना संक्रमित मरीजों की बिना झिझक व डर के देखभाल कर रहे हैं। यही सबकुछ इस केयर सेंटर को सबसे बेहतर बनाएगा। उन्होंने कहा कि कोरोना पाॅजिटिव मरीजों को अब बाहर रैफर नहीं किया जाएगा। कोविड केयर सेंटर तेगुबेहड में भी डाॅक्टरों का प्रदर्शन काफी अच्छा है। इस बारे लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।

सैंपलिंग बढाने के लिए बीडीओ की भूमिका अहम
शिक्षा मंत्री ने कहा कि जिला मेें हर रोज 500 के करीब सैंपल लिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि एक्टिव केस फाईडिग अभियान के दौरान आशा को लोग पूरा परिवार तंदरूस्त होने की बात कहकर टाल देते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस अभियान में सहयोग करें। उन्होंने खण्ड विकास अधिकारियों से कहा कि वह संबंधित क्षेत्रों के पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों को उनके क्षेत्र में सैंपल लेने की तिथि के बारे में दो दिन पहले बताएं और अधिक से अधिक लोगों को टेस्ट करवाने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से कुल्लू व भुंतर अधिक आबादी के क्षेत्रों में सैंपलिंग बढ़ाने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि जिला में पाॅजिटिव के मामले दिनोदिन कम हो रहे हैं। यह अच्छी बात है कि सभी के प्रयासों से चेन टूट रही है।

मंत्री ने अस्पताल के सभी वार्डों का किया दौरा
गोविंद ठाकुर ने इससे पूर्व क्षेत्रीय अस्पताल के सभी वार्डों का दौरा किया। उन्होंने 100 बिस्तरों के अस्पताल का बारीकी से निरीक्षण किया और सुविधाआंे का जायजा लिया। उन्होंने वार्डो में मरीजों का कुशलक्षेम भी पूछा। उन्होंने निर्माणाधीन भवन का कार्य शीघ्र पूरा करवाने के लिए उपायुक्त को कहा। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक खण्ड बनने से अस्पताल में कोविड केयर सेंटर विकसित कर पाए हैं जो जिला के अलावा लाहौल-स्पिति, पांगी व मण्डी के कुछ भागों के पाॅजिटिव मरीजों को लाभान्वित करेगा।

बैठक के दौरान चिकित्सकों ने कोरोना महामारी पर अपने अनुभव सांझा किए। डाॅ. सत्यव्रत वैद्य ने कहा कि लाॅकडाउन हटते ही बाहरी प्रदेशों से यहां बहुत से लोग आए और महामारी का फैलाव शुरू हो गया। अधिकांश लोग टेस्ट करवाना नहीं चाहते जो संक्रमण फैलने का दूसरा बड़ा कारण है। उन्होंने लोगों में टेस्ट करवाने को लेकर और जागरूकता उत्पन्न करने की बात कही। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों के अभिभावक आईसोलेशन में हैं, उन बच्चों की कांउसलिंग के लिए हेल्पलाईन 1800 1212830 जारी की गई है। लोगों को इसका समुचित लाभ उठाना चाहिए।
डाॅ. कल्याण ने बताया कि कोरोना के मरीज आने से उनका अनुभव और प्रगाढ़ होता गया और अब वह कोरोना मरीजों से बिना किसी भय के मिलते व उपचार करते हैं। डाॅ. ने कहा कि बहुत से बीमार लोग परोक्ष तौर पर उनके सम्पर्क में आए जो दूसरे दिन पाॅजिटिव पाए गए, लेकिन वह अभी तक पाॅजिटिव नहीं हुए है। उनका कहना है कि वह  हर समय अच्छे से मास्क का प्रयोग करते हैं और अपने हाथों की बार-बार सफाई करते हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के बाद दूसरी गंभीर बीमारियों के मरीज भी अस्पताल आने से डर रहे हैं और उनमें ये बीमारियां गंभीर रूप धारण कर रही हैं। उन्होंने लोगों का आहवान किया कि अस्पताल में बिना किसी डर के आएं और अपना उपचार करवाएं।
चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. हीरा लाल ने कहा कि वह पाॅजिटिव हो चुके हैं और नेगेटिव आने के बाद भी लंबे समय पर तंदरूस्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि थोड़ा सा भी लक्षण व्यक्ति में हो तो तुरंत उसे टेस्ट करवा लेना चाहिए। समय पर बीमारी का पता चलने से दूसरे व्यक्ति संक्रमित होने से बच जाते हैं।
डाॅ. हीरा लाल ने कहा कि कोविड के कारण हो रही मौतों के कारण सामाजिक व्यवहार में भी बड़ा परिवर्तन आया है। यहां तक कि घर-परिवार के लोग भी मृतक का अंतिम संस्कार करने से संकोच कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोविड के कारण हुई मौत के मामले में मृतक शरीर को सेनेटाईज करके तथा किट में लपेट कर अंतिम संस्कार के लिए भेजा जाता है। परिजन उस व्यक्ति को देख भी सकते हैं और अंतिम संस्कार  भी कर सकते हैं। उसे छूने में भी कोई परहेज नहीं, क्योंकि कीटाणु दूसरों को संक्रमित नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि लोग अस्थियां लेने से भी परहेज कर रहे हैं जो अच्छी बात नहीं है। मृतक शरीर आग में जलकर नष्ट हो जाता है और अवशेष मंे किसी प्रकार के कीटाणु नहीं रहते।
डाॅ. सुरेश ने अपने अनुभव सांझा करते हुए कहा कि हिम सुरक्षा अभियान के दौरान जिला में अभी तक लगभग 2000 लोगों में लक्षण पाए गए हैं जिनमें से केवल 575 सैंपल लिए गए हैं। उन्होंने सैंपलिंग बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि लोग सैंपल लेने से डरते हैं कि कहीं पाॅजिटिव न आ जाए। लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। यदि वह पाॅजिटिव बनकर अपने परिजनों से मिल रहे हैं, उनके साथ रह-रहे हैं तो सम्भवत बुजुर्गों व बच्चों के लिए खतरा उत्पन्न कर सकते हैं।
उपायुक्त डाॅ. ऋचा वर्मा व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. सुशील चंन्द्र ने भी जिला में कोविड-19 की स्थिति पर विस्तारपूर्वक चर्चा की।
मनाली मण्डल के अध्यक्ष दुर्गा सिंह ठाकुर व क्षेत्रीय अस्पताल के समस्त चिकित्सक बैठक में मौजूद रहे।

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