किसान आंदोलन से हिमाचल पथ परिवहन सोलन डिपो को लगी दस लाख की चपत

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DNN सोलन ब्यूरो (आदित्य सोफत)
02 जनवरी। दिल्ली में किसान आंदोलन के चलते हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम सोलन डिपो को करीब दस लाख की चपत लगी है। हालांकि, गुरुवार से हिमाचल पथ परिवहन सोलन डिपो ने एक बस दिल्ली के लिए रवाना की है, लेकिन अधिकतर बस के दिल्ली न जाने से काफी नुकसान हुआ है। किसान आंदोलन की मार सोलन डिपो ही नहीं, बल्कि हिमाचल पथ परिवहन निगम परवाणू डिपो पर भी पड़ी है। परवाणू डिपो को करीब एक से डेढ़ लाख रुपए का घाटा प्रति दिन के हिसाब से उठाना पड़ा है।
बता दें कि मार्च 2020 में कोरोना के बढ़ते खतरे को देखते हुए बाहरी राज्यों में बसें जानी बंद हो गई थी और पुरे लॉकडाउन में प्रदेश सहित बाहरी राज्यों में थम गए थे। इसके बाद अनलॉक की प्रक्रिया देश में शुरू हुई और राज्यों की सीमाएं खुली। सीमाएं खुलने पर बसों को बाहरी राज्यों के लिए रवाना किया गया। इस दौरान हिमाचल पथ परिवहन निगम सोलन डिपो को दिल्ली के लिए एक रुट व परवाणू डिपो को भी एक रुट आबंटित हुआ। नियमों के साथ बसों को दिल्ली भेजा गया था। लगभग एक माह तक हिमाचल पथ परिवहन निगम द्वारा दिल्ली रूटों पर अपनी बसों को चलाया।  ततपश्चात किसान आंदोलन के चलते यह दोनों रुट बंद हो गए  और केवल चंडीगढ़ तक ही बसों को भेजा जाता थे।  परन्तु अब निगम द्वारा बसों को डायवर्ट कर दिल्ली के लिए बसों को भेजा जाने लगा है और यह रुट गुरुवार से शुरू किए है।
इस रुट से जाने लगे सोलन डिपो की बसें 
घाटे में चल रहे निगम के दिल्ली रुट पर सोलन व परवाणू डिपो ने गुरुवार से बसें दौड़ानी शुरू कर दी है।  निगम ने बसों को डायवर्ट किया है और सोलन डिपो की बस को हरियाणा के राई से होकर दिल्ली भेजना शुरू किया है।
क्या कहना है क्षेत्रीय प्रबंधक हिमाचल पथ परिवहन निगम सोलन डिपो का
हिमाचल पथ परिवहन निगम सोलन डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक सुरेश धीमान का कहना है कि दिल्ली में किसान आंदोलन के चलते बसों को दिल्ली नहीं भेजा जा रहा था।  इसके चलते सोलन डिपो को यह रुट बंद होने से एक महीने में 10 लाख रुपए का घाटा हुआ है। उन्होंने बताया कि काफी समय बाद यह रुट गुरुवार से बाहल किया गया है और हरियाणा के राई से यह रुट चलाया गया है।

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