एम्स बिलासपुर और  ICMR सेंटर फॉरइनोवेशन एंड बायोडिजाइन चंडीगढ़ के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए

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DNN बिलासपुर

12 जुलाई। एम्स, बिलासपुर और आईसीएमआर सेंटर फॉरइनोवेशन एंड बायोडिजाइन (सीआईबीओडी) के बीच एक समझौता ज्ञापन पर 9 जुलाई को हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर एम्स बिलासपुर के कार्यकारी निदेशक, प्रोफेसर (डॉ) वीर सिंह नेगी, डॉ विक्रांत कंवर और सीआईबीओडी के प्रधान अन्वेषक डॉ वीरेंद्र गर्ग सहित उनकी टीम उपस्थित रही। इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य प्रधान मंत्री मोदी की ‘आत्मनिर्भर भारत‘ पहल के तहत जनता के उपयोग के लिए नवीन, कम लागत वाली स्वास्थ्य तकनीकों का विकास और परीक्षण करना है।
प्रारंभिक चरण में, सीआईबीओडी हिमाचल प्रदेश के तीन दुर्गम, कठिन और आदिवासी जिलों (चंबा, लाहौल स्पीति और किन्नौर) में एक अभिनव कम लागत वाला टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म स्थापित करने में मदद करेगा, जो राज्य के इन दूर-दराज क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए एम्स बिलासपुर से जुड़ा होगा। डॉक्टर के परामर्श के अलावा, यह टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म पॉइंट ऑफ केयर डायग्नोस्टिक उपकरणों से भी लैस होगा जिसमें डिजिटल स्टेथोस्कोप, रक्तचाप, पल्स ऑक्सीमेट्री, ईसीजी रिकॉर्डर, और त्वचा, आंख और कान की जांच के लिए उपकरण इत्यादि शामिल होंगे। यह प्लेटफॉर्म रोगी के स्वास्थ्य मापदंडों को रिकॉर्ड करने और 50 विभिन्न रक्त और मूत्र की जांच के टेस्टकरने में भी सक्षम होगा। डॉक्टर टेलीमेडिसिन उपकरणों द्वारा जांच के बाद डायग्नोस्टिक टेस्ट के आदेश देंगे जो इसमशीन द्वारा ही किये जा सकेंगे। जांच के परिणामों के आधार पर दवाएं निर्धारित की जाएंगी, जिन्हें मरीज स्वास्थ्य सेवा केंद्र से प्राप्त कर सकते हैं। यह सेवा डॉक्टर की रोगी के साथ वास्तविक परामर्श के समक्ष है, तथा एक छत के नीचे सामान्य रोगियों की अधिकांश जरूरतंे पूरी करती है। इस प्रकार दूर के स्वास्थ्य केंद्रों में परामर्श और जांच के लिए रोगी अनावश्यक रेफरल से बचेंगे जो वित्तीय बाधाओं के कारण दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों के गरीब रोगियों की पहुंच से बाहर हैं और आदिवासी दुर्गम क्षेत्रों में गरीब आबादी द्वारा स्वास्थ्य सेवा के उपयोग में एक प्रमुख बाधा है। एम्स, बिलासपुर और सीआईबी ओओडी की यह अनूठी पहल उनके लिए वरदान साबित होगी।

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