DNN सोलन ब्यूरो (आदित्य सोफत)
08 मार्च। कांग्रेस द्वारा श्वेत पत्र जारी करने के मांग पर भाजपा ने सार्वजनिक मंच पर आकर बहस करने की चुनौती दे दी है। भाजपा का कहना है कि अगर सोलन विधानसभा क्षेत्र के विधायक कर्नल धनी राम शांडिल ने 463 करोड़ के विकास करवाएं होते तो आज क्षेत्र को विकास की जरूरत न पड़ती। पत्रकारवार्ता के दौरान बघाट बैंक के चेयरमैन व पूर्व नगर परिषद के अध्यक्ष पवन गुप्ता ने कहा कि 463 करोड़ के विकास कार्य करवाने के बाद सोलन के विधायक 671 वोटों से न जीतते। उन्होंने कहा कि कांग्रेस केवल झूठे बयान देकर लोगों को गुमराह कर रही है, उन्हें विकास कार्यों से कोई लेना देना नहीं है।
राजेंद्र राणा सोलन में फैलाना चाहते है अशांति
उन्होंने विधायक राजेंद्र राणा पर आरोप लगाए की वह सोलन में आकर अशांति फैलाना चाहते है और सोलन का माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का कल्चर बन चुका है जिस प्रकार विधानसभा में उन्होंने अशांति फैलाई और अब वह यहां पर आकर ठीक उसी प्रकार की कोशिशें कर रहे है। पवन गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस ने सोलन नगर निगम में प्रभारी लगाए राजेंद्र राणा पहले सुजानपुर में पंचायतीराज चुनावों की हालात देंखे फिर सोलन में आकर बयानबाजी करें। उन्होंने कहा डा. राजीव बिंदल द्वारा कार्य किए है और अगर कांग्रेस उन कार्यों की तुलना अपने किए कार्यों से कर सकती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपनी यात्रा के दौरान 42 करोड़ रुपये के उद्घाटन और शिलान्यास किए हैं। इसके साथ ही सभी 17 वार्डों के संतुलित और समान विकास के लिए नगर निगम सोलन के विकास के लिए 5.80 करोड़ रुपये का बजट भी दिया गया है। शहर में तीन बड़े पार्किंग स्थल के निर्माण के लिए दो करोड़ रुपये दिए गए हैं। लोगों को जल्द ही शहर में 500 से अधिक वाहनों की पार्किंग मिलेगी। सोलन अस्पताल को पांच नए चिकित्सक दिए गए हैं। ट्रांसपोर्ट सिटी के लिए 2 करोड़ रुपये का बजट भी दिया गया है। इसके अलावा भी कई प्रकार के विकास कार्य सोलन शहर में चले हुए है।
सोलन को उठाना पड़ा 01 हजार करोड़ का नुकसान
पवन गुप्ता ने कहा कि 2012 में भी कांग्रेस सरकार के दौरान नगर निगम का मुद्दा उठाया गया था, लेकिन मांग को दरकिनार किया गया। इसके बाद 2015 में भी कोशिशे की गई और इस दौरान भी विधायक व पूर्व मंत्री कर्नल धनी राम शांडिल ने कोई पैरवी नहीं की। अगर उस समय सोलन को नगर निगम का दर्जा मिलता तो आज सोलन स्मार्ट सिटी में होता और लगभग 01 हज़ार करोड़ का बजट सोलन को मिलता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस कारण सोलन को लगभग बी हज़ार करोड़ का नुक्सान उठाना पड़ा।















