DNN सोलन ब्यूरो (आदित्य सोफत)
20 अप्रैल। हिमाचल प्रदेश में कोरोना से निपटने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे दावों की पोल इन दिनों वायरल हो रहे वीडियो से खुल रही है। कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद सोलन के एक व्यक्ति का सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो को कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद व्यक्ति ने स्वयं बनाया है और उसने वीडियो के जरिए स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े किए हैं। खास बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में ही बार बार विवादों में आ रहा है।
जानकारी के अनुसार कोरोना वायरस के खतरे को लेकर प्रदेश सरकार ने पाबंदियां लगानी शुरू कर दी है और स्वास्थ्य सुविधाओं को धरातल पर उतरने के दावे कर रही है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर स्वयं कोरोना की स्थिति का पता लगने के प्रदेशभर का भ्रमण कर जायजा लें रहे है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहती है। यही कारण है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो वीडियों स्वास्थ्य विभाग की कथनी और करनी पर सवाल खड़े कर रहे है। सोलन में शिशु रोग विशेषज्ञ का वीडियो वायरल होने के बाद अब कोरोना संक्रमित मरीज का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियों में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर व्यक्ति ने आई प्रकार के आरोप लगाए है। स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिला में स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोल रहे है और वीडियो के वायरल होने के बाद फिर स्वास्थ्य विभाग विवादों में आ गया है। विवाद खड़ा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग मामले में जांच बिठाता है और उसके बाद मामला मामला ठंडे बस्ते में पहुंच जाता है।
अब मंगलवार को बीएसएनएल से सेवानिवृत्त हुए व्यक्ति के कोरोना संक्रमित आने के बाद उन्होंने वीडियो बनाकर सोशल मिडिया पर वायरल किया है। इस वीडियो के माध्यम से कई आरोप स्वास्थ्य विभाग पर लगाए है। यही नहीं टैस्ट से लेकर दवाइयों आबंटन तक की प्रणाली पर कई सवाल खड़े किए गए है। व्यक्ति का कहना है कि जब उन्होंने घर जाने के बाद दवाइयों का पैकेट खोला तो वह हैरान रह गए। उन्होंने देखा कि पैकेट में बाहर दी गई प्रिसक्रिप्शन व अंदर मौजूद दवाओं के नाम में अंतर था और ऐसे में उन्हें यह समझने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था कि कौन सी दवा खानी है और कौन सी नहीं। यानी कि दवाओं के नाम जो पैकेट के बाहर दिए गए थे वह दवाएं पैकेट के अंदर मौजूद ही नहीं थी। इसको लेकर जब उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से सम्पर्क साधा तो पर्ची पर दिया गया नंबर ही एग्जिस्ट नहीं था। वीडियो में उन्होंने कोरोना टैस्ट के लिए भीड़ व अधिक समय को लेकर भी सवाल उठाए है। उनका कहना है कि उनका जैसा व्यक्ति जब यह नहीं समझ पा रहा है कि कौन सी दवा खानी है और कौन सी नहीं। तो ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों का क्या हाल होता होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
क्या कहना है वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक का वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. राजन उप्पल का कहना है कि व्यक्ति से सम्पर्क साधा गया है और उन्हें कौन सी दवाई कब लेनी है के बारे में बताया जा चुका है। उन्होंने कहा पर्ची पर जैनेरिक दवाइयां लिखी जाती है और ब्रांड अलग हो सकता है। वहीं, पर्ची पर दिया गया नंबर किन्ही कारणों से बंद है। इसे ठीक करने के लिए कहा गया है और वाट्सएप्प ग्रुप में व्यक्ति का नंबर दाल दिया गया है ताकि उन्हें हर जानकारी मिल सके।















