Solan और Spiti के कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों ने जीते पुरस्कार

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डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय (यूएचएफ), नौणी द्वारा संचालित दो कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर–अटारी), जोन–1, लुधियाना के स्थापना दिवस समारोह के दौरान सम्मानित किया गया।

केवीके लाहौल एवं स्पीति–II, ताबो के प्रमुख डॉ. आर.एस. सिपहिया को प्रभावी नेतृत्व, प्रतिबद्धता तथा फ्रंटलाइन विस्तार कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन और कृषि अनुसंधान व ज्ञान प्रबंधन को सशक्त बनाने हेतु अभिनव रणनीतियों के लिए परफॉर्मेंस एक्सीलेंस अवॉर्ड से नवाजा गया। पिछले तीन वर्षों से अधिक समय से केवीके में सेवाएं दे रहे डॉ. सिपहिया ने सेब एवं मटर जैसी स्पीति की विशिष्ट फसलों के विपणन को सुदृढ़ करने के साथ-साथ पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील शीत मरुस्थलीय क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में योगदान दिया है।

उनके नेतृत्व में केवीके के बगीचों में स्पीति सेब की उत्कृष्ट गुणवत्ता का सफल प्रदर्शन किया गया, जिसके परिणामस्वरूप दो बार इनकी लगभग ₹40 लाख की नीलामी हुई। प्राकृतिक विधियों से तैयार 120 सेब पौधों की ₹9 लाख में नीलामी हुई तथा इन्हें राज्य सरकार से सितारा प्रमाणन भी प्राप्त हुआ। किसानों के हित में डॉ. सिपहिया ने केवीके में फूड प्रोसेसिंग प्रयोगशाला को भी क्रियाशील बनाया, जिससे अधिशेष एवं विपणन योग्य न होने वाले फलों का मूल्य संवर्धन संभव हो सका। एफ.एस.एस.ए.आ.ई. लाइसेंस प्राप्त होने के बाद इस इकाई ने लाखों रुपये का राजस्व अर्जित करना शुरू कर दिया है और आगामी वर्ष तक इसके आत्मनिर्भर बनने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, स्पीति घाटी में किए गए व्यापक ऑन-फार्म परीक्षणों और फ्रंट लाइन प्रदर्शनों के परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय की पैकेज ऑफ प्रैक्टिस में नवोन्मेषी तकनीकों को शामिल किया गया है।

इस अवसर पर केवीके सोलन (कंडाघाट) की टीम—डॉ. अनुराग शर्मा, डॉ. मीरा देवी एवं डॉ. आरती शुक्ला—को उच्च मूल्य फसल उत्पादनप्राकृतिक एवं जैविक खेती तथा विविधीकरण मॉडल  विषय के अंतर्गत आय सृजन हेतु विविधीकृत समशीतोष्ण बागवानी पर प्रस्तुत पोस्टर के लिए सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति पुरस्कार प्रदान किया गया। इस पोस्टर के माध्यम से गांव धारों की धार के कृषि उद्यमी करन सिंह की सफलता गाथा प्रस्तुत की गई। जोन–1 के 72 केवीके से प्राप्त प्रविष्टियों में से चयनित इस प्रस्तुति में उच्च मूल्य नर्सरी, उच्च सघनता सेब बागवानी, ब्लूबेरी तथा कार्नेशन उत्पादन जैसे उनके अभिनव उद्यमों को दर्शाया गया। केवीके सोलन (KVK Solan ) के सहयोग से विकसित उनकी उपलब्धियों को परिश्रम एवं नवाचार का अनूठा उदाहरण बताते हुए हिमाचल प्रदेश के युवा किसानों के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में प्रस्तुत किया गया।

यह पुरस्कार मुख्य अतिथि प्रो. राजेश्वर एस. चंदेल, कुलपति, यूएचएफ नौणी; डॉ. परविंदर श्योराण, निदेशक, आईसीएआर–अटारी, जोन–I; डॉ. गुरबचन सिंह, पूर्व अध्यक्ष, ए.एस.आर.बी.; डॉ. नचिकेत कोतवालिवाले, निदेशक, आईसीएआर–सिफेट, लुधियाना; तथा डॉ. पी.एस. बिर्थल, पूर्व निदेशक, आई.सी.ए.आर.–राष्ट्रीय कृषि अर्थशास्त्र एवं नीति अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली की उपस्थिति में प्रदान किए गए।

पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को बधाई देते हुए प्रो. चंदेल ने कहा कि इस प्रकार की उपलब्धियां विश्वविद्यालय एवं केवीके द्वारा किसान समुदाय के हित में किए जा रहे प्रभावी कार्यों का प्रमाण हैं।  निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. इंदर देव सहित विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों एवं कर्मचारियों ने भी सभी पुरस्कार विजेताओं को शुभकामनाएं दीं।

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