DNN सोलन
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कृषकों का आह्वान किया कि वे प्राकृतिक खेती को समर्पण एवं ईमानदारी के साथ अपनाएं ताकि उत्पादन एवं भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़े। आचार्य देवव्रत आज डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी, सोलन में प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के तहत सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती पर आयोजित किसान परिचर्चा को संबोधित कर रहे थे।आचार्य देवव्रत ने कहा कि अनुसंधानों ने यह सिद्ध किया है कि प्राकृतिक खेती भूमि की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाती है तथा मानव के स्वास्थ्य की रक्षा करती है। उन्होंने कहा कि वे प्राकृतिक कृषि के संबंध में स्वयं अनुभव करने के उपरांत ही किसानों को इस दिशा में प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे 25 वर्ष तक रसायनिक खाद युक्त कृषि एवं जैविक खेती करने के उपरांत प्राकृतिक खेती की ओर प्रवृत हुए तथा इसके परिणाम ने उन्हें किसानों को प्राकृतिक खेती की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
राज्यपाल ने कहा कि प्राकृतिक कृषि प्रकृति के मूल तत्वों मूलत: देसी गाय पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रयोग में लाए जाने वाले अन्य तत्व भी प्रकृति से ही लिए गए हैं। देसी गाय के मात्र एक ग्राम गोबर में 300 करोड़ से अधिक लाभदायक जीवाणु पाए जाते हैं। यह जीवाणु भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाते हैं। देसी गाय के गोबर के उपयोग से प्राकृतिक रूप से केंचुओं की बढ़ोत्तरी होती है जो भूमि को दीर्घावधि के लिए कृषि योग्य बनाकर वर्षा जल संग्रहण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आचार्य देवव्रत ने कहा कि खाद के लिए प्रयोग में लाए जा रहे विभिन्न प्रकार के रसायन आरंभ में पैदावार बढ़ाते हैं किन्तु धीरे-धीरे भूमि को बंजर बना देते हैं। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे पदम श्री डॉ. सुभाष पालेकर द्वारा प्रचारित प्राकृतिक खेती की विधि अपनाएं। यह विधि आर्थिक रूप से भी लाभदायक है तथा इसमें रसायनिक खाद की अपेक्षा जल भी काफी कम प्रयुक्त होता है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक कृषि के उत्पादों के विपणन के लिए भी योजनाबद्ध कार्य किया जा रहा है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे प्राकृतिक खेती के प्रचार-प्रसार के लिए समूह बनाकर कार्य करें।
राज्यपाल ने कहा कि रसायन खाद युक्त कृषि कैंसर जैसे भयावह रोग को बढ़ावा दे रही है। शोध के अनुसार गत एक से डेढ़ वर्ष में कैंसर रोगियों की सं या में 25 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। प्राकृतिक कृषि के उत्पाद इस दिशा में भी मनुष्य एवं अन्य जीवों के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं।
















