NAUNI UNIVERSITY के इस वैज्ञानिक को देशभर में मिला दूसरा पुरस्कार

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डॉ वाईएस परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक डॉ आर॰के॰ अग्रवाल द्वारा सौर ऊर्जा द्वारा फसलों से आय वृद्धि’ विषय पर लिखी किताब को देश भर में दूसरा पुरस्कार मिला है। भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने अपनी संचालित प्राकृतिक ऊर्जा पुरस्कार योजना के तहत इस राष्ट्रीय स्तरीय पुरस्कार के लिए डॉ अग्रवाल की किताब को चुना है।  डॉ॰ अग्रवाल की हिन्दी में लिखी इस पुस्तक का शीर्षक सौर ऊर्जा द्वारा फसलों से आय वृद्धि’ है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा वर्ष 2016 के दूसरे पुरस्कार के लिए इस पुस्तक को चुना है। इस पुरस्कार में  60,000 रुपये की राशि भी शामिल है। इस पुस्तक में वर्ष 1990 से डॉ अग्रवाल के क्षेत्र अनुभवों के आधार पर सौर ऊर्जा से फसलों को सुखाने की तकनीक के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है।

 इस अवसर पर डॉ॰ अग्रवाल ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने के अवसर प्रदान करने के लिए विश्वविद्यालय को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह पुस्तक सुखाए गए उत्पादों की गुणवत्ता के साथ-साथ बाजार में इनके मूल्य में भी सुधार की ओर केन्द्रित है। उन्होनें बताया कि अत्यंत लागत प्रभावी होने के कारण सौर ऊर्जा से फल और सब्जियों को सुखना किसानों विशेषकर महिलाओं को काफी लाभ पहुंचाएगा। उत्पादों के मूल्यवर्धन से न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि महिलाओं को भी लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक से सौर ऊर्जा से फलों और सब्जियों को सुखाने के क्षेत्र में कार्य कर रहे छात्रों और अन्य हितधारकों के लिए भी उपयोगी होगी।  डॉ अग्रवाल ने नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और डीएसटी की साइंस फॉर इक्विटी एम्पावरमेंट एंड डेवलपमेंट डिवीजन का भी धन्यवाद किया जिन्होनें पिछले कई वर्षों से कृषक समुदाय के लिए सोलर ड्रायर विकसित करने के परियोजनाओं स्वीकृत की है। इस परियोजना के अंतर्गत विश्वविद्यालय द्वारा विकसित ये सोलर ड्रायर हिमाचल और उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में स्थापित किए गए हैं।

 

  नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एचसी शर्मा ने इस अवसर पर डॉ॰ अग्रवाल को बधाई दी। उन्होंने कहा कि कृषि उपज बढ़ाने के साथ कृषि उपज का नुकसान कम करने के दोहरे लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए इस पुस्तक में सौर ऊर्जा से सुखाने की तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। वानिकी महाविद्यालय के डीन डॉ पीके महाजन और पर्यावरण विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ एसके भारद्वाज ने भी डॉ अग्रवाल को बधाई दी।

 

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