DNN मंडी
उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर ने कहा कि जिला में डेंगू व चिकनगुनिया जैसे रोगों से बचाव के लिए आवश्यक प्रबंध किए गए हैं। क्षेत्रीय अस्पताल मंडी में डेंगु बुखार की पहचान के लिए विशेष टेस्ट की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से मच्छरों के काटने से पैदा होने वाली डेंगू व अन्य बिमारियों से बचाव के लिए आवश्यक परामर्श जारी किया है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मंडी डा. जीवानंद की ओर से जारी परामर्श के अनुसार डेंगु व चिकिनगुनिया दिन के समय एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। एडीज मच्छर का लार्वा पानी की सतह अथवा बर्तन की ऊपरी दीवारों पर उपस्थित रहता है। इस रोग के मुख्य लक्षणों में टांगों व शरीर पर लाल रंग के धब्बे उभर आते हैं। उन्होंने कहा कि इन रोगों से बचने के लिए व्यक्तिगत व सामूहिक तौर पर कुछ सावधानियां बरती जानी आवश्यक हैं। मच्छरों को मारने के लिए घर के कमरों, स्नानागृह, रसोई इत्यादि में ऐरोसाल (वतिलयन) का छिड़काव कुछ मिनटों तक करने के उपरांत 15 से 20 मिनट तक इन्हें बंद रखें। छिड़काव का समय मच्छरों के काटने की सर्वाधिक संभावना वाले प्रातःकाल के प्रथम प्रहर अथवा दोपहर के अंतिम प्रहर ठीक रहता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मंडी डा. जीवानंद की ओर से जारी परामर्श के अनुसार डेंगु व चिकिनगुनिया दिन के समय एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। एडीज मच्छर का लार्वा पानी की सतह अथवा बर्तन की ऊपरी दीवारों पर उपस्थित रहता है। इस रोग के मुख्य लक्षणों में टांगों व शरीर पर लाल रंग के धब्बे उभर आते हैं। उन्होंने कहा कि इन रोगों से बचने के लिए व्यक्तिगत व सामूहिक तौर पर कुछ सावधानियां बरती जानी आवश्यक हैं। मच्छरों को मारने के लिए घर के कमरों, स्नानागृह, रसोई इत्यादि में ऐरोसाल (वतिलयन) का छिड़काव कुछ मिनटों तक करने के उपरांत 15 से 20 मिनट तक इन्हें बंद रखें। छिड़काव का समय मच्छरों के काटने की सर्वाधिक संभावना वाले प्रातःकाल के प्रथम प्रहर अथवा दोपहर के अंतिम प्रहर ठीक रहता है।
शरीर को अच्छी तरह से ढांपने वाले वस्त्रों का प्रयोग करें और मच्छरदानी को भी उपयोग में लाएं। मच्छर भगाने की औषधि अथवा नीम के पत्ते, नारियल के खोल अथवा भूसी जलाकर मच्छरों से निजात पाई जा सकती है। इसके अतिरिक्त दरवाजों व खिड़कियों पर जाली या पर्दा लगाकर मच्छरों का प्रवेश रोका जा सकता है। घर में पानी के सभी बर्तनों को ढक कर रखें और सप्ताह में एक बार जल भंडारण टैंक, बर्तन, कूलर, पशु-पक्षियों के पानी पीने के बर्तन, पौधों के गमलों, टपक टायर इत्यादि की साफ-सफाई अवश्य करें।

सामूहिक स्तर पर मच्छर पैदा होने वाले संभावित स्थलों की पर्याप्त साफ-सफाई का अभियान चलाएं। डेंगू के बारे में जागरूकता के लिए विभिन्न गतिविधियां चलाते हुए पेयजल भंडारण टैंकों की सफाई, आस-पास परिसर की सफाई, ऐरोसाल की व्यापक मात्रा में उपलब्धता, आवासीय परिसर व चैक-चैराहों के समीप लंबी घास की सफाई, मच्छरदानी के निरंतर उपयोग को प्रोत्साहन के लिए शिविरों का आयोजन और लोगों को स्प्रे व फागिंग जैसी गतिविधियों के दौरान सहयोग के लिए प्रेरित करें। संस्थागत स्तर पर भी अस्पताल, पाठशाला, महाविद्यालय व अन्य संस्थानों व कार्यालयों में ऊपर वर्णित गतिविधियां साप्ताहिक आधार पर चलाई जाएं। फागिंग अथवा कोई अन्य अल्ट्रा वायलेट वाल्यूम स्प्रे उपयोग में लाएं।
उन्होंने कहा कि संदिग्ध डेंगु बुखार से पीड़ित व्यक्ति का बुखार उतरने के उपरांत भी कुछ दिनों तक विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि यह बिमारी तेजी से गंभीर रूप धारण कर लेती है और बिमारी के तीसरे से पांचवें दिन इसके लक्षण ज्यादा प्रभावी तरीके से दृष्टिगोचर होते हैं। बुखार की स्थिति में शरीर का तापमान 39 डिग्री सेल्सियस तक रखने का प्रयास करें। पीड़ित व्यक्ति को सामान्य आहार के साथ पर्याप्त मात्रा में तरल पेय जैसे पानी, सूप, दूध व फलों का जूस इत्यादि का सेवन करवाएं। रोगी व्यक्ति पूर्ण रूप से आराम करें। इसके अन्य लक्षणों में लाल धब्बे अथवा दाने, नाक या मसूड़ों से खून आना, लगातार उल्टियां आना, उल्टियें में खून आना, काला मल आना, उनींदापन, पेट दर्द, अत्यधिक प्यास लगना अथवा गला सूखना, पीली, ठंडी अथवा शीतल त्वचा या सांस लेने में कठिनाई होने पर तुरंत चिकित्सक की सलाह लें और बिना चिकित्सीय सलाह के कोई दवाई इत्यादि न लें।



















