Dnewsnetwork
सोलन। भारतीय जनता पार्टी सोलन के जिलाध्यक्ष रत्न सिंह पाल ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों में 35,555 करोड़ रुपये का नया ऋण लिया है, जिससे प्रदेश पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। रत्न सिंह पाल ने दावा किया कि 31 जनवरी 2026 तक हिमाचल प्रदेश पर कुल बकाया ऋण 1,01,863 करोड़ रुपये पहुंच चुका था, जो अब बढ़कर 1.10 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में दिए गए लिखित उत्तर पर आधारित हैं।
भाजपा जिलाध्यक्ष ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राशि का ऋण लेने के बावजूद प्रदेश को इसका ठोस लाभ कितना मिला। उन्होंने पूछा कि इस अवधि में कितने नए उद्योग स्थापित हुए, कितने बड़े अस्पताल और शिक्षण संस्थान बने, कितने स्थायी रोजगार के अवसर पैदा हुए तथा प्रदेश की आय बढ़ाने वाली कितनी नई परिसंपत्तियां तैयार की गईं। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में भी सरकार की ओर से ऋण लेने का सिलसिला जारी है। उनके अनुसार जुलाई 2026 तक सरकार करीब 2,800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण ले चुकी थी। इसमें अप्रैल में 900 करोड़, मई में 500 करोड़, जून में 400 करोड़ और 300 करोड़ तथा जुलाई में 700 करोड़ रुपये का ऋण शामिल है।
रत्न सिंह पाल ने आरोप लगाया कि सरकार की वित्तीय नीति कर्ज लेकर खर्च चलाने तक सीमित होकर रह गई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को तीन वर्ष सत्ता में रहने के बाद हर समस्या के लिए पिछली सरकार को जिम्मेदार ठहराने के बजाय अपनी सरकार के वित्तीय प्रबंधन का भी जवाब देना चाहिए। उन्होंने सरकार से प्रदेश की वास्तविक वित्तीय स्थिति पर तत्काल श्वेतपत्र जारी करने की मांग की। साथ ही उन्होंने मांग की कि दिसंबर 2022 से अब तक लिए गए कुल नए ऋण, चुकाए गए मूलधन और ब्याज तथा ऋण की राशि में से विकास कार्यों, पूंजीगत निर्माण और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण पर खर्च की गई राशि का पूरा ब्यौरा जनता के सामने रखा जाए।
रत्न सिंह पाल ने कहा कि सरकार द्वारा लिया गया ऋण अंततः प्रदेश की जनता और आने वाली पीढ़ियों पर वित्तीय दायित्व डालता है। उन्होंने कहा कि सरकार को आंकड़ों के साथ जनता को यह बताना चाहिए कि बढ़ते कर्ज के बदले प्रदेश में किस प्रकार की परिसंपत्तियां और आय के नए स्रोत तैयार किए गए हैं।














