पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष ने बजट के ‘ऐतिहासिक परिवर्तन’ और हिमाचल के विकास पर कांग्रेस के भ्रम को नकारा
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शिमला: पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शिमला में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान केंद्रीय बजट को ‘आत्मनिर्भर भारत’ का आधार स्तंभ बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की जमकर सराहना की। जयराम ठाकुर ने कहा कि आज देश का आर्थिक मॉडल पूरी तरह बदल चुका है और भारत अब ‘सब्सिडी-आधारित’ अर्थव्यवस्था के दौर से निकलकर ‘निवेश-आधारित’ विकास के युग में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने वर्ष 2013-14 और आगामी 2026-27 के बजट आंकड़ों की तुलनात्मक व्याख्या करते हुए बताया कि पिछले एक दशक में भारत ने विकास की वह ऊंचाइयां छुई हैं जिनकी पहले कल्पना करना भी असंभव था। इसका सबसे ठोस प्रमाण कुल पूंजीगत व्यय (CAPEX) में हुई 516 प्रतिशत की भारी वृद्धि है; जहाँ 2013-14 में यह व्यय मात्र 1.98 लाख करोड़ रुपये था, वहीं अब यह 12.2 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुँच गया है। उन्होंने आंकड़ों के माध्यम से बताया कि यह निवेश सीधे तौर पर रक्षा, कृषि, शिक्षा और बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है। रक्षा बजट में 287 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जबकि कृषि मंत्रालय का बजट 27 हजार करोड़ से बढ़कर 1.32 लाख करोड़ और रेलवे का CAPEX 63 हजार करोड़ से बढ़कर 2.93 लाख करोड़ रुपये हो चुका है। सड़क और राजमार्गों में निवेश 8 गुना बढ़ चुका है और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 76 गीगावॉट से बढ़कर 254 गीगावॉट तक पहुँच गई है। सामाजिक प्रगति का उल्लेख करते हुए ठाकुर ने कहा कि महिला श्रम भागीदारी 23 से बढ़कर 41 प्रतिशत हुई है और बहुआयामी गरीबी दर 55 प्रतिशत से घटकर केवल 11 प्रतिशत रह गई है। आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं ने 42 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा दी है, जबकि देश में एम्स की संख्या 7 से बढ़कर 23 हो गई है। हिमाचल प्रदेश के संदर्भ में ठाकुर ने कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार राज्य को रेल, सड़क और स्वास्थ्य के लिए रिकॉर्ड सहायता दे रही है। उन्होंने बताया कि 2026-27 के लिए कर हस्तांतरण के रूप में 13,949 करोड़ और अनुदान सहायता के तहत 10,243 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, साथ ही राज्य को 8,309 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त ऋण भी दिया गया है। उड़ान योजना, अटल टनल और एम्स बिलासपुर जैसे बड़े प्रोजेक्ट केंद्र की हिमाचल के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र की 90:10 फंडिंग वाली करीब 200 योजनाएं ही हिमाचल के विकास की रीढ़ हैं।
सुक्खू सरकार की विफलता और राजनीतिक प्रहार
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने हिमाचल के लिए राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद होने का सीधा ठीकरा वर्तमान सुक्खू सरकार पर फोड़ते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने 16वें वित्त आयोग के सामने राज्य का पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रखा। उन्होंने कहा कि कर्नाटक जैसी कांग्रेस शासित सरकारों ने ही आरडीजी को एक ‘विसंगति’ बताकर इसका पुरजोर विरोध किया था, ऐसे में हिमाचल कांग्रेस का केंद्र को दोष देना सरासर दोहरे मापदंड हैं। ठाकुर ने दावा किया कि 15वें वित्त आयोग ने पहले ही आरडीजी बंद करने के संकेत दे दिए थे, लेकिन सुक्खू सरकार सत्ता संभालने के बाद से अब तक सोई रही। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से सवाल किया कि वह अपने उस विजन का खुलासा करें जिसमें वे 2027 तक हिमाचल को आत्मनिर्भर और 2032 तक सबसे अमीर राज्य बनाने का दावा करते हैं, जबकि हकीकत में राज्य की अर्थव्यवस्था तहस-नहस हो चुकी है। जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार ने अपने तीन साल केवल भाजपा को कोसने में बिता दिए हैं और अब स्थिति यह है कि कर्मचारियों को वेतन और पेंशन देना भी एक चुनौती बन गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को सलाह दी कि वे जोश में आकर दी गई गलत चुनावी गारंटियों के लिए जनता से माफी मांगें क्योंकि सरकार एक भी वादा पूरा नहीं कर पाई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विधायक प्राथमिकता बैठकों का कोई औचित्य नहीं रह गया है क्योंकि सरकार ने विधायक निधि ही बंद कर दी है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने पंचायत चुनावों के लिए सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले को ‘हार का डर’ करार दिया और कहा कि सरकार पंचायतों में लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं चाहती। अंत में, उन्होंने कर्ज के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस ने कर्ज लेने की सभी सीमाएं लांघ दी हैं; जहाँ पूर्व भाजपा सरकार ने 5 साल में केवल 19,600 करोड़ का कर्ज लिया था, वहीं वर्तमान सरकार ने प्रदेश को कर्ज के गहरे दलदल में डुबो दिया है। ठाकुर ने मांग की कि मुख्यमंत्री अपनी भाषा को संयमित रखें और केंद्र के सामने नए सिरे से अपना पक्ष रखें ताकि प्रदेश का कुछ भला हो सके। इस अवसर पर पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज, बलवीर वर्मा, संजय सूद, कर्ण नंदा, अमित ठाकुर उपस्थित रहे।
आर.डी.जी. पर मुख्यमंत्री के विलाप पर आंकड़ों सहित घेरा
प्रेसवार्ता में हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश की वर्तमान सुक्खू सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए इसे दिशाहीन और वित्तीय रूप से विफल करार दिया। ठाकुर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अपनी प्रशासनिक कमियों को छिपाने के लिए केंद्र सरकार को कोसना तर्कसंगत नहीं है, बल्कि यह सरकार के ‘ज्ञान के भंडार’ और कुप्रबंधन का नतीजा है जिसने हिमाचल को बर्बादी के कगार पर ला खड़ा किया है। उन्होंने राजस्व घाटा अनुदान (RDG) के तुलनात्मक आंकड़े पेश करते हुए कांग्रेस को आईना दिखाया और बताया कि जहां मनमोहन सिंह की सरकार के 10 वर्षों (2005-2015) में हिमाचल को मात्र 18,091 करोड़ रुपये की RDG मिली, वहीं नरेंद्र मोदी की सरकार के 10 वर्षों (2015-2025) में यह राशि चार गुना से भी अधिक बढ़कर 77,823 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। ठाकुर ने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री एक तरफ 2027 तक राज्य को आत्मनिर्भर बनाने का दावा कर मुंगेरी लाल के हसीन सपने देख रहे हैं, तो दूसरी तरफ RDG के लिए विलाप कर रहे हैं, जो उनकी कथनी और करनी के अंतर्विरोध को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं को 1500 रुपये देने का वादा इसी अनुदान के भरोसे किया गया था, जो अब झूठ की भेंट चढ़ गया है। नेता प्रतिपक्ष ने सरकार को चेतावनी दी कि बिना किसी विजन के राज्य “रेंग” रहा है और भ्रष्टाचार व गुंडागर्दी चरम पर है। उन्होंने मुख्यमंत्री को सलाह दी कि वे चाटुकार सलाहकारों के बजाय अपने मंत्रियों की सुनें और यदि वे सरकार चलाने में सक्षम नहीं हैं, तो जनता के सम्मान में तुरंत इस्तीफा दे दें। ठाकुर ने साफ किया कि कांग्रेस सरकार की तमाम गारंटियां केंद्र के पैसे के दम पर चल रही हैं और अब जनता इनके “पाप के घड़े” को फोड़ने के लिए तैयार है।















