DNN दिल्ली
10 मार्च केन्या के सर्वोच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति माननीया मार्था के. कूमे, ईजीएच के नेतृत्व में केन्या के सर्वोच्च न्यायालय के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज (10 मार्च, 2023) राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।
राष्ट्रपति भवन में प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि केन्या एक ऐसा देश है, जिसके साथ भारत के सदियों पुराने मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। भारत को केन्या का विकास भागीदार होने पर गर्व है। भारत केन्या की नई सरकार के साथ उच्च स्तरीय राजनीतिक संवाद की परंपरा को बनाए रखने के लिए उत्सुक है। दोनों देशों को द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को और मजबूत करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि न्यायमूर्ति कूमे, केन्याई सर्वोच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश हैं। राष्ट्रपति ने केन्या में सभी के लिए न्याय को सुलभ बनाने और महिलाओं को सशक्त बनाने के प्रति उनके प्रयासों की सराहना की।
राष्ट्रपति ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह की गरिमा बढ़ाईं
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (10 मार्च, 2023) नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के 6वें दीक्षांत समारोह की गरिमा बढ़ाईं और उसे संबोधित किया।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि पूरे भारत के छात्र जेएनयू में पढ़ते हैं। यह विश्वविद्यालय विविधताओं के बीच भारत की सांस्कृतिक एकता का जीवंत प्रतिबिंब प्रस्तुत करता है। इस विश्वविद्यालय में कई अन्य देशों के छात्र भी अध्ययन करते हैं। इस तरह एक शिक्षण केंद्र के रूप में जेएनयू का आकर्षण भारत से बाहर भी है।
राष्ट्रपति ने कहा कि जेएनयू अपनी प्रगतिशील गतिविधियों और सामाजिक संवेदनशीलता, समावेशन व महिला सशक्तिकरण के संबंध में समृद्ध योगदान के लिए जाना जाता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि जेएनयू के छात्रों व शिक्षकों ने शिक्षा और शोध, राजनीति, सिविल सेवा, कूटनीति, सामाजिक कार्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, मीडिया, साहित्य, कला व संस्कृति जैसे विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावशाली योगदान दिया है। उन्होंने आगे इस पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की कि जेएनयू ‘नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क’ के तहत देश के विश्वविद्यालयों के बीच साल 2017 से लगातार दूसरे स्थान पर है।
राष्ट्रपति ने कहा कि जेएनयू की सोच, मिशन और उद्देश्यों को इसके संस्थापक विधानों में व्यक्त किया गया। इन बुनियादी आदर्शों में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता, लोकतांत्रिक जीवनशैली, अंतरराष्ट्रीय समझ और समाज की समस्याओं को लेकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण शामिल हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय समुदाय से इन मूलभूत सिद्धांतों के अनुपालन के संबंध में अटल रहने का अनुरोध किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि चरित्र निर्माण भी शिक्षा के प्रमुख उद्देश्यों में से एक है। तात्कालिक बहाव में आकर चरित्र निर्माण के अमूल्य अवसरों को कभी नहीं गंवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा छात्रों में जिज्ञासा, प्रश्न करने और तर्क के उपयोग की एक सहज प्रवृत्ति होती है। इस प्रवृत्ति को सदैव प्रोत्साहित करना चाहिए। युवा पीढ़ी द्वारा अवैज्ञानिक रूढ़ियों के विरोध को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। विचारों को स्वीकार करना या खारिज करना, वाद-विवाद और संवाद पर आधारित होना चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि एक विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों को पूरे विश्व समुदाय के बारे में चिंतन करना होता है। जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, युद्ध व अशांति, आतंकवाद, महिलाओं की असुरक्षा और असमानता जैसे अनेक मुद्दे मानवता के सामने चुनौतियां प्रस्तुत कर रहे हैं। प्राचीन काल से लेकर आज तक विश्व के प्रमुख विश्वविद्यालयों ने व्यक्ति और समाज की समस्याओं का समाधान खोजा है और समाज के लक्ष्यों को प्राप्त करने में अपना योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों को लेकर सतर्क और सक्रिय रहना विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है।
राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि जेएनयू जैसे विश्वविद्यालय हमारे स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों को बनाए रखने, संविधान के मूल्यों का संरक्षण करने और राष्ट्र निर्माण के लक्ष्यों को प्राप्त करने में अपना प्रभावी योगदान देंगे।















