DNN मंडी
23 अप्रैल। माउंटेन मैन दशरथ मांझी कहानी की कहानी तो सभी ने सुनी और पढी है। जिन्होंने केवल एक हथौड़े और छेनी से ही पूरे पहाड़ को काटकर सड़क बना डाली थी। लेकिन आज जिस मांझी की हम बात कर रहे हैं, वह पहाड़ तो नहीं काट रहे हैं लेकिन पैदल ही पहाड़ चढ़ने का साहस लिए लंबी यात्रा पर पैदल निकले हैं। अपने बचपन के सपने को पूरा करने व पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से पश्चिमी बंगाल के 26 वर्षीय मिलन कुमार मांझी हावड़ा ब्रिज से लद्दाख तक पैदल यात्रा कर रहे हैं। अपनी पैदल यात्रा के दौरान शनिवार को मिलन कुमार मांझी मंडी पहुंचे। बंगाल के हुगली स्थित सिंगुर निवासी मिलन मांझी अब तक 1800 किलोमीटर से ज्यादा यात्रा कर चुके हैं।
मिलन कुमार मांझी ने बताया कि वे 22 फरवरी 2022 को बंगाल से लद्दाख तक 2500 किलोमीटर पैदल पर निकले हैं। अब तक उन्हें चले हुए 60 दिन बीत चुके हैं और 100 दिन के अंदर लद्दाख पहुंचने का उन्होंने लक्ष्य रखा है। मिलन कुमार मांझी ने बताया कि लद्दाख की चोटी पर पहुंच कर भी तिरंगा फहराएंगे। इमरान मिलन मांझी लोगों को अधिक से अधिक पेड़ लगाने व पर्यावरण को लखन करने का भी संदेश दे रहे हैं। उन्होंने हर एक आदमी को प्रतिदिन कुछ ना कुछ कार्य पर्यावरण को शुद्ध रखने का करना चाहिए, जिससे आने वाली पीढ़ी भी सुरक्षित रह सके। मिलन कुमार मांझी के पिता बंगाल के हूगली में चाय की दुकान चलाते हैं। मिलन कुमार मांझी कॉमर्स के छात्र हैं और स्नातक की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने निजी कंपनी में नौकरी भी की, लेकिन कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन में नौकरी भी चली गई। अब मिलन कुमार मांझी अपने पिता के साथ ही है चाय की दुकान चलाते हैं। मांझी ने बताया कि लद्दाख तक सफर करने का उनका बचपन का सपना था लेकिन आर्थिक तंगी के कारण मोटर साइकिल नहीं खरीद सके और पैदल ही अपने सपने को पूरा करने के लिए निकल पड़े हैं। मिलन कुमार मांझी ने बताया कि वह रोजाना 30 किलोमीटर पैदल सफर करते हैं। उन्होंने बताया कि इस सफर के दौरान लोग भी उनकी मदद कर रहे हैं।















