हिमाचली सपूत शहीद प्रशांत ठाकुर मरणोपरांत सेना मेडल से अंलकृत, परिजनों ने जताया सेना का आभार

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DNN नाहन(अब्दुल)

12मार्च। हिमाचली सपूत शहीद प्रशांत सिंह ठाकुर को मरणोपरांत सेना मेडल से अंलकृत करने पर शहीद के परिजनों ने इसके लिए सेना का आभार व्यक्त किया है। बता दें कि हाल ही में चंद रोज पहले उत्तर प्रदेश के बरेली में सिरमौर जिला के गलाना गांव से ताल्लुक रखने वाले शहीद प्रशांत ठाकुर की माता रेखा देवी को यह सम्मान लेफिटनेंट जनरल योगेंद्र दिमरी ने सेना द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह में भेंट किया।दरअसल ग्रेनेडियर प्रशांत सिंह ठाकुर जम्मू-कश्मीर के बारामूला में कार्यरत थे, जोकि 17 अगस्त 2020 को बारामूला में ही एक आंतकी हमले में शहीद हो गए थे। प्रशांत ठाकुर ने अपनी सूझबुझ, कर्तव्य के प्रति निष्ठा, असाधरण शौर्य व साहस के परिणामस्वरूप दो आंतकवादियों को मार गिराया था। लिहाजा इस हिमाचली सपूत को वीरतापूर्ण कार्य के लिए मरणोपरांत सेना मेडल से अलंकृत किया गया।अपने बहादुर बेटे का सम्मान लेकर घर लौटी उनकी माता रेखा देवी ने देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले जाबांज बेटे की शहादत को याद करते हुए कहा कि शहीद प्रशांत न केवल उनका बेटा था, बल्कि पूरे देश का बेटा था। ऐसे सपूत को जन्म देने के लिए वह खुद को गौरवान्वित महसूस करती है।वहीं शहीद प्रशांत सिंह ठाकुर के बड़े भाई विशाल ठाकुर भी अपने छोटे भाई की शहादत पर गर्व महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि बेशक आज उनका भाई इस दुनिया में नहीं है, लेकिन देश के प्रति अपने प्राणों को न्यौछावर करने वाले भाई प्रशांत की बहादुरी पर हमेशा गर्व रहेगा। मरणोपरांत उनके भाई शहीद प्रशांत को सेना मेडल देने पर उन्होंने भी सेना का आभार व्यक्त किया।
रेखा देवी, शहीद प्रशांत की मां विशाल ठाकुर, प्रशांत का बड़ा भाई वहीं शहीद प्रशांत ठाकुर को सेना मेडल मिलने से क्षेत्रवासी भी खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। स्थानीय निवासी पंकज ठाकुर ने कहा कि शहीद प्रशांत ठाकुर की शहादत पर क्षेत्रवासियों को भी गर्व है। साथ ही वह सरकार सहित सेना का भी आभार व्यक्त करते है कि मरणोपरांत प्रशांत ठाकुर की वीरता को देखते हुए उन्हें सेना मेडल दिया गया है।पंकज ठाकुर, स्थानीय निवासी
ऐसे पाई थी ग्रेनेडियर प्रशांत सिंह ठाकुर ने शहादत17 अगस्त 2020 को जम्मू और कश्मीर के बारामूला में एक केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल पर हमले के बाद ग्रेनेडियर प्रशांत सिंह अपनी टीम के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और आंतकवादियों को भागने से सफलतापूर्वक रोका। शहीद प्रशांत ने एक मजबूत घेराबंदी स्थापित करने के लिए अपनी टीम और अपने कंपनी कमांडर को महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस बीच ग्रेनेडियर प्रशांत सिंह ठाकुर ने स्वेच्छा से तलाशी अभियान का नेतृत्व करते हुए सेब के बगीचे के अंदर एक छिपे हुए आंतकवादी को सफलतापूर्वक ढूंढ निकाला और आड़ का उपयोग करते हुए चतुराई से आगे बढ़े थे। इसी दौरान आंतकवादियों ने दो हथगोलों से हमला कर दिया था, जिसमें ग्रेनेडियर प्रशांत सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद भी प्रशांत सिंह ने जवाबी फायरिंग के साथ इलाके को घेरना जारी रखा था और दो आंतकवादियों को सफलापूर्वक मार गिराया था। इसी बीच ग्रेनेडियर प्रशांत सिंह ठाकुर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देते हुए शहीद हो गए थे।

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