DNN सुबाथू
छावनी बोर्ड सुबाथू की बैठक में मंगलवार को निर्वाचित सदस्यों के खर्चों के बिल पारित करने पर आपत्ति जताने से नाराज छावनी बोर्ड के अध्यक्ष बैठक को ही छोड़ कर चले गए। सदस्यों ने इसका कड़ा विरोध जताया और छावनी कार्यालय के बाहर ही धरने पर बैठ गए। सायं पांच बजे तक छावनी के निर्वाचित सदस्य वहीं बैठे रहे और अधिकारियों के इस रवैये से रक्षा संपदा विभाग के उच्चाधिकारियों को भी अवगत करवा दिया। उधर, छावनी अध्यक्ष ने निर्वाचित सदस्यों के विकास कार्यों में बाधा पहुंचाने की बात कही है।
मंगलवार को करीब दो माह बाद छावनी बोर्ड सुबाथू की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में छावनी अध्यक्ष और 14 गोरखा प्रशिक्षण केंद्र के कमांडेंट ब्रिगेडियर रवि रावत के अलावा सीईओ तनु जैन, छावनी बोर्ड के चार निर्वाचित सदस्य व अन्य अधिकारी मौजूद थे। बैठक आरंभ होते ही कई मुद्दों पर चर्चा शुरू हुई। इस दौरान जनवरी से मार्च तक छावनी क्षेत्र में हुए विभिन्न खर्चों पर चर्चा के साथ उन्हें पारित करने का प्रस्ताव भी आया। इसी बीच सदस्यों ने इस पर आपत्ति जाहिर करते हुए कहा कि पहले उन्हें यह बताया जाए कि किन-किन कार्यों पर कितना धन व्यय हुआ है और उसके बाद ही वह उसे पारित करेंगे। इस दौरान छावनी अध्यक्ष ने कहा कि खर्चे तो किए जा चुके हैं, तो उन्हें पारित करने में क्या आपत्ति है। बैठक के एजेंडे में छावनी अस्पताल के एक चिकित्सक पर लोगों द्वारा लगाए गए कुछ आरोपों पर भी चर्चा की जानी थी। इसी बीच जब काफी देर तक गहमागहमी होती रही तो छावनी अध्यक्ष प्रथम गोरखा राइफल्स के स्थापना दिवस कार्यक्रम में शिरकत करने चले गए।
तत्पश्चात छावनी उपाध्यक्ष दिनेश गुप्ता और निर्वाचित सदस्यों शकुन चौहान, मनीष गुप्ता व अरिता शर्मा छावनी अध्यक्ष के बैठक से उठ कर चले जाने के विरोध में छावनी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। धरने पर बैठे सदस्यों ने आरोप लगाया कि यह सरासर लोकतंत्र का गला घोटने जैसा और छावनी अधिनियम 2006 के प्रावधानों के खिलाफ है और वह इसका पुरजोर विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि व्यय के बिलों को बिना देखे वह कैसे पारित कर सकते हैं। यह भी हो सकता है कि उसमें कोई गड़बड़ी हो और जनता उनसे ही इसका हिसाब मांगेगी। उन्होंने बताया कि मंगलवार के इस प्रकरण से रक्षा संपदा विभाग के उच्चाधिकारियों को भी अवगत करवा दिया गया है।
सदस्य विकास की बजाए व्यक्तिगत कार्यों को देते हैं तरजीह: ब्रिगेडियर रावत
छावनी अध्यक्ष और 14 गोरखा प्रशिक्षण केंद्र के कमांडेंट ब्रिगेडियर रवि रावत ने सदस्यों के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वह बैठक छोड़ कर नहीं गए। सदस्यों को चर्चा के लिए एक घंटे का समय दिया गया, लेकिन जब सहमति नहीं बनी तो वह प्रथम गोरखा रेजीमेंट के स्थापना दिवस कार्यक्रम में चले गए। उन्होंने कहा कि जिस व्यय की मद पर चर्चा हो रही थी, उससे काफी पहले ही सदस्यों को अवगत करवा दिया गया था और उन्हें आगे भेजने का भी समय निर्धारित होता है। ब्रिगेडियर रावत ने कहा कि सदस्य विकास कार्यों में हर बार रोड़ा अटकाते हैं और विकास कार्यों की बजाए अपने निजी कार्यों को तरजीह देते हैं। उन्होंने कहा कि बैठक में छावनी के डॉक्टर के मामले पर भी चर्चा की जानी थी, क्योंकि डॉक्टर के खिलाफ दर्जनों लोगों ने शिकायत दी है।