नौणी में पहाड़ी भाषा के संरक्षण व संवर्धन पर चर्चा

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DNN सोलन
सोलन जिला की निर्मल ग्राम पंचायत नौणी के पंचायत अधिवेशन कक्ष नौणी में हिमाचल प्रदेश कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी शिमला, डॉ यशवंत सिंह परमार पीठ हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी शिमला एवं साहित्य संगम सोलन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित लोक साहित्य में लोक भाषा का योगदान विषय पर परिचर्चा व कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
इसमें हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी में डॉ. परमार पीठ के अध्यक्ष डा. ओमप्रकाश शर्मा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की, जबकि सोलन जिला राजस्व अधिकारी केशव राम ने अध्यक्षता की।
अपने संबोधन में मुख्यातिथि डा. ओमप्रकाश ने परमार पीठ की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि लोक भाषा लोक संस्कृति तथा लोक कलाओं के संरक्षण में हमारी लोक भाषाओं का योगदान रहा है और रहेगा।


इस मौके पर बोलते हुए केशव राम ने कहा कि हमें अपनी मां बोली का संरक्षण करना चाहिए। इसकी शुरूआत अपने घर से करनी चाहिए। आप किसी भी भाषा का ज्ञान लें, लेकिन अपनी बोली सभी को जरूर आनी चाहिए।
हिमाचल प्रदेश कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी शिमला के सचिव डॉ. कर्म सिंह ने कहा अकादमी की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी । साथ ही हिमाचली भाषा को भारतीय भाषाई संविधान के अनुच्छेद- 8 के अनुसार भाषाई दर्जा दिलाने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रयासों की जानकारी दी।
डॉ. शिव भारद्वाज ने कहा कि अपनी बोली के संरक्षण के लिए हमें घरों से प्रयास करने होंगे, जब तक हम अपनी भाषा को अहमियत नहीं देंगे तब तक इसका संरक्षण नहीं होगा। उन्होंने कहा कि घर में तो हम अपनी बोली में बात कर सकते हैं ताकि हमारे बच्चे हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहें।
डा. शंकर वासिष्ठ ने अभिनंदन किया और वरिष्ठ साहित्यकार और नौणी पंचायत के प्रधान मदन हिमाचली ने मंच का संलाचन किया।
इस समारोह में सोलन के 25 कवि व साहित्यकारों ने भाग लिया। बाघाटी- बाघली बोलियों के संरक्षण पर प्रकाश डाला। डा. शंकर वासिष्ठ ने बाघली बोली में सियुणी धागे कविता पढ़ी। हेमंत अत्रि ने बघाटी भाषा में लिखी चार कविताएं, राचीगोआ नानका, गागुटी, मोबाइल फोनो रा नजारा और बाबू नीं आवंदे काबू सुनाकर तालियां बटोरी। रोशन जसवाल ने लोक भाषा, लोक व्यंजन,लोकगीतों के संरक्षण पर अपने विचार सांझा किए। राम लाल वर्मा ने म्हारा बघाट प्यारा कविता पढ़ी। सविता ठाकुर ने नदी कविता के माध्यम से जीवन-मुत्यु के अर्थ को स्पष्ट किया। मदन हिमाचली ने बघाटी कविता वरला-परला पेश कर वाहवाही लूटी। इसके अलावा सुनीता शर्मा, संजीव अरोड़ा, यशपाल कपूर, पदम वर्मा, सुरेश शुक्ला, सचपाल समेत अन्य लेखकों ने भी पहाड़ी भाषा के संरक्षण व संवर्धन के विषय में अपने विचार रखे।
नौणी पंचायत के पूर्व प्रधान व समाजसेवी बलदेव सिंह ठाकुर ने अतिथियों का धन्यवाद किया। इस मौके पर पंचायत के उपप्रधान हरदेव सिंह ठाकुर, वार्ड सदस्य अनीता कौंडल, विद्या देवी, शिव चरण, नरेंद्र कुमार, पुष्पा शर्मा के अलावा बीडीसी सदस्य अनीता देवी भी मौजूद रही।

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