GOOD NEWS सोलन में खुलेगा बीएसआई का रीजनल सेंटर

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डीएनएन सोलन
बॉटेनिकल सर्वे ऑफ इंडिया कोलकाता के निदेशक डॉ. परमजीत सिंह ने कहा कि बॉटेनिकल सर्वे ऑफ इंडिया (बीएसआई) कोलकाता सोलन में अपना रीजनल सेंटर खोलेगी। इसके लिए केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं क्लाइमेट चेंज मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। शीघ्र ही सोलन में बीएसआई के वैज्ञानिकों की नियुक्ति होगी। डॉ. सिंह यहां हिमालयन रीजन की जैवविविधता पर आयोजित नेशनल वर्कशॉप में भाग लेने आए थे।

जम्मू-कश्मीर व हिमाचल की वनसंपदा को होगा संरक्षण
निदेशक ने कहा कि सोलन में बीएसआई का रीजनल सेंटर खुलने से हिमाचल प्रदेश व जम्मू-कश्मीर में पाई जाने वाली वन संपदा का संरक्षण व संवर्धन हो सकेगा। उन्होंने कहा कि इन दो राज्यों के लिए अभी तक कोई रीजनल सेंटर नहीं था। हालांकि हिमालय में पाई जाने वाली वनसंपदा का उल्लेख 1890 में प्रकाशित शोध फ्लोरा ऑफ ब्रिटिश इंडिया में भी मिलता था। यहां उस समय भी सर्वे किया गया था। 1947 में भारत के आजाद होने के बाद बीएसआई ने उत्तर पश्चिम के लिए देहरादून और उत्तरपूर्वी राज्यों के लिए शिलांग में सेंटर खोला था। 1979 सिक्कम और 1980 में अरूणाचल प्रदेश खुला था। अब जम्मू-कश्मीर व हिमाचल के लिए सोलन में सेंटर खोला जा रहा है।

नौणी यूनिवर्सिटी से चल रही बात
डॉ. परमजीत सिंह ने बताया कि इसके लिए वह डॉ. यशवंत सिंह परमार यूनिवर्सिटी नौणी के वाइस चांसलर डॉ. एचसी शर्मा से बात करके उनके साथ एक एमओयू साइन करेंगे। यहां पहले ही फॉरेस्टरी और हॉर्टीक्लचर पर कार्य किया जा रहा है। बीएसआई रीजनल सेंटर खुलने से वन संपदा की पहचान और इनके संरक्षण के लिए दीर्घकालीन योजनाओं पर काम होगा। साथ ही समय -पर पर मॉनेटरिंग कार्य भी होगा।

ये होगा रीजनल सेंटर से फायदा
डॉ. सिंह ने बताया कि हिमाचल में पाए जाने वाले कुछ पौधे ऐसे हैं, जो अब विलुप्त हो गए हैं और कुछ विलुप्त होने की कगार पर है। रीजनल सेंटर कुलने से ऐसे पौधों का संरक्षण करेंगे और विलुप्त होने की कगार पर जो पौधे हैं, उनकी नर्सरी तैयार की जाएगी ताकि वह यहां के कल्चर से जुड़े रहें। संरक्षित क्षेत्रों को चिन्हित कर उनके नैचुरल जलवायु में बचाने के प्रयास किए जाएंगे ताकि आने वाली पीढिय़ों को हम कुछ दे सकें। साथ ही यह भी शोध की जाएगी कि कौन सा पेड़ पहले था और अब नहीं है। प्रोटेक्टिट एरिया, वाइल्ड लाइफ सैंचुरी के माध्यम से भी फ्लोरा का संरक्षण होगा। डॉ. सिंह ने बताया कि हिमालय में वनस्पति की 49000 प्रजातियां पाई जाती है।

 

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