DNN सोलन
17 जून। आईसीएआर राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना की संस्थागत विकास योजना के तहत खरीदी गई 697 पुस्तकों को डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के कुलपति डॉ परविंदर कौशल ने छात्रों और कर्मचारियों को समर्पित की गई। ये नवीनतम प्रकाशन बागवानी, वानिकी, प्रबंधन और संबद्ध विषयों पर आधारित हैं।
यह पुस्तकें लगभग 10 लाख रुपये की लागत से खरीदी गई हैं और विश्वविद्यालय के सत्यानंद स्टोक्स पुस्तकालय में रखी गई हैं। इन पुस्तकों के अलावा, छात्रों को उनके संबंधित विषयों में नवीनतम साहित्य से लैस करने के लिए परियोजना के तहत 5 लाख रुपये के अन्य प्रकाशन भी खरीदे जा रहें है।
कार्यक्रम की शुरुआत पुस्तकालय में मां सरस्वती की प्रतिमा के अनावरण से हुई। पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. एच आर शर्मा ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया और छात्रों के लिए सीखने के नए संसाधनों देने के लिए उनका धन्यवाद दिया। आईडीपी के प्रधान अन्वेषक डॉ. केके रैना ने सभा को आईडीपी के तहत की जा रही विभिन्न गतिविधियों से अवगत करवाया। उन्होंने आईडीपी की उन्नत शिक्षण संसाधनों की गतिविधि के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि पुस्तकालय आधुनिक ऊर्जा कुशल प्रकाश व्यवस्था और एलईडी बोर्ड पर स्विच कर रहा है।
इस अवसर पर डॉ परविंदर कौशल ने कहा कि आईडीपी के सभी सदस्यों को छात्र सुविधाओं में सुधार के लिए पहल करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय किसी भी छात्र के जीवन के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है और इसलिए इसे सभी आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ लिंक करने का हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए। डॉ. कौशल ने कहा कि विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों को सभी पुस्तकालय सेवाओं के बारे में अवगत किया जाना चाहिए ताकि वह इनका पूरा इस्तेमाल कर सकें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय छात्रों के लिए एक वन-स्टॉप सॉफ्टवेयर समाधान खरीदेगा जिससे छात्र आईसीएआर की सभी ई-सेवाओं के लिए एक जगह पर ही लॉगिन करना होगा। डॉ. कौशल ने शिक्षकों से कहा कि वे छात्रों को कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए प्रोत्साहित करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे खुद को वायरस से सुरक्षित रख सकें। इस अवसर पर सहायक लाइब्रेरियन यशोदा नेगी ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। सभी वैधानिक अधिकारी, आईडीपी टीम के सदस्य और पुस्तकालय कर्मचारी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी का नाम सत्यानंद स्टोक्स के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने हिमाचल प्रदेश में सेब की खेती शुरू करके आर्थिक क्रांति लाई। भवन का उद्घाटन 1988 में भारत के पूर्व राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन द्वारा किया गया था। वर्षों से पुस्तकालय ने 79000 से अधिक पुस्तकों और दस्तावेजों का संग्रह बनाया है और पुस्तकों को जारी करने और वापस करने के लिए आधुनिक आरएफआईडी प्रणाली का उपयोग करता है। इसमें ई-बुक्स, थीसिस, ई-थीसिस (कृषिकोश), जर्नल्स, ई-जर्नल्स (सीईआरए), और सीडी-रोम डेटाबेस के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय डेटाबेस भी हैं।















