DNN सुबाथू (सोलन)
08 दिसंबर। शहीद बिलजंग गुरूंग को सैन्य व राजकीय सम्मान के साथ मंगलवार को सुबाथू के रामबाग में अंतिम विदाई दी गई। बिलंजग गुरूंग भारतीय सेना के 14 जीटीसी में 3/1 जीआर के जवान रहे है। बीते दिनों सियाचिन के ग्लेशियर में अंर्तराष्ट्रीय सीमा की तैनाती के दौरान शहीद बिलजंग गुरूंग बर्फ की गहरी खाई में जा गिरे, लेकिन बचाव दल के कड़े प्रयास के बावजूद बिलजंग गुरूंग ने शहादत पाई है। मंगलवार को सुबाथू के राम बाग में पूरे विधि विधान के साथ सेना के धर्मगुरू ने शहीद के परिजनों की मौजूदगी में शहीद का अंतिम संस्कार करवाया। सेना के वाहन में जब शहीद का पार्थिव शरीर को रामबाग लाया गया तो हर आंख नम नजर आई।
सुबाथू के रामबाग में मंगलवार को ठीक 12.55 पर सेना वाहन में शहीद के पार्थिव शरीर को लाया गया। इसके बाद अपने घर के चिराग को तिरंगे में लिपटा देख परिजनों की चीख पुकार से पूरा वातावर्ण गमगीन हो गया।देश भक्ति धुन पर सेना की एक टुकड़ी ने शहीद को अंतिम घाट के लिए शव यात्रा शुरू की और भारत माता की जय के लोगों ने नारे लगाए अंतिमघाट पर पहुंचने के बाद स्वास्थ्य मंत्री डा. राजीव सहजल, बिग्रेड़ियर एच.एस. संधू सहित सेना के अन्य अधिकारियों ने शहीद को श्रद्धांजलि पुष्पचक्र अर्पित किए। इसके बाद शहीद के पिता लोक राज गुरूंग ने अपने लाड़ले पुत्र को मुख्यग्नि दी। इस मौके पर सेना की एक टुकड़ी ने हवा के फायर कर शहीद को सलामी दी। जिसके बाद शहीद से लिपटा तिरंगा ब्रिगेड़ियर एसएस संधू ने शहीद के पिता को सौपा।
मंत्री सहजल ने भी दी भावभीनी श्रद्धांजलि
29 वर्षीय सैनिक बिल्जन गुरंग की आज सोलन जिला के सुबाथु में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि की गई। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा आयुर्वेद मंत्री डा. राजीव सहजल ने कृतज्ञ प्रदेश वासियों की और से शहीद सैनिक को श्रद्धाजंलि अर्पित की। डा. राजीव सहजल शहीद के अंतिम संस्कार में सम्मिलत हुए और प्रदेश सरकार की ओर से शहीद को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। डा. सहजल ने कहा कि शहीद बिल्जन गुरंग ने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए भारतीय सेना की उच्च परम्पराओं के अनुरूप शहादत पाई। उन्होंने कहा कि बिल्जन गुरंग एक सच्चे योद्धा थे और उनके देश प्रेम एवं कार्य के प्रति जज़्बे को सदैव याद रखा जाएगा। उन्होंने परमपिता परमात्मा से शहीद की आत्मा की शांति और उनके परिवार को इस अपूर्णीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।















