DNN कुल्लू
22 सितम्बर। शिक्षा व कला, भाषा एवं संस्कृति मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि कर्मकाण्ड एक वृहद विषय है और इसके गहन अध्ययन की जरूरत है। वह कुल्लू के देवसदन में हि.प्र. संस्कृत अकादमी द्वारा आयोजित पांच दिवसीय ज्योतिष कर्मकाण्ड प्रशिक्षण सम्मेलन में आचार्यों व ज्योतिषियों को संबोधित कर रहे थे।
गोविंद ठाकुर ने कहा कि ज्योतिष एक विज्ञान और स्नातन धर्म की रीढ़ है। उन्होंने कहा कि कर्मकाण्ड में अनेक प्रकार की व्याधियों व विप्पतियों के निवारण की क्षमता है और ऐसे साक्ष्य प्रायः देखने को मिलते भी हैं। उन्होंने कहा कि समाज में जब कभी भी प्राकृतिक व्याधियों ने जन्म लिया तो यज्ञ, हवन इत्यादि से इनका निदान करने के अनेक उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि सम्भवतः कर्मकाण्ड व हवन इत्यादि से काफी हद तक कोरोना संक्रमण से मुक्ति मिल सकती है।
शिक्षा मंत्री ने अकादमी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में अध्यात्मवाद का संदेश जाता है जो जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि परम्पराओं को सहेज कर रखना सभी का दायित्व है। प्रत्येक व्यक्ति को सुसंस्कृत होने के लिए जरूरी है कि वह जीवन में अध्यात्मवाद को अपनाए। उन्होंने कहा कि कर्मकाण्ड का वर्तमान कालखण्ड में महत्व और भी बढ़ जाता है जब व्यक्ति अनेक प्रकार की भौतिकवादिता से घिरा हुआ है। उन्होंने कहा ज्योतिष शास़्त्र का धर्म से गहरा संबंध है। ज्योतिष के अनुसार यदि मस्तिष्क पर चंदन का टिका लगाया जाए तो इससे अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं, अनेक व्याधियों से मुक्ति मिलती है। इसका वैज्ञानिक प्रमाण भी है।
गोविंद ठाकुर ने कहा कि संस्कृत भाषा हमारी संस्कृति का दर्पण है और इस भाषा को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के लिए नई शिक्षा नीति लाई है जो समाज को एक अलग दिशा प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति को प्रदेश में लागू किया जा रहा है और इसकी पूरी तैयारियां कर ली गई हैं। नई नीति बच्चों में अपनी मातृ भाषा, स्थानीय भाषा में अध्ययन का अवसर प्रदान करेगी ताकि बच्चे सुसंस्कृत बन सके और समाज की विषमताओं को आरंभिक अवस्था में समझने के योग्य बन जाएं। उन्होंने अंगे्रजों द्वारा हमारे देश पर थोंपी गई शिक्षा पद्यति को काला अध्याय बताते हुए कहा कि मैकाले की शिक्षा प्रणाली देश को गुलामी की ओर ले जाने वाली थी।
संस्कृत अकादमी के सचिव भगत बत्सल ने अपने संबोधन में कहा कि संस्कृत महज एक भाषा नहीं है, बल्कि आत्मा है हमारी संस्कृति की। इसका संवर्द्धन करना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि हमारे ग्रंथ, पुराण सभी संस्कृत में लिखे गए हैं जिनका अनुवाद अब सभी भाषाओं में उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि भारत को विश्व का आध्यात्मिक गुरू फिर से बनाना है तो हमें नालंदा जैसे विश्वविद्यालयों की आवश्यकता है। वैसी शिक्षा पद्यति की जरूरत है। उन्होंने कर्मकाण्ड करने वाले पण्डितों से आग्रह किया कि वे गांव-गांव अथवा घर-घर जाकर बच्चों में संस्कार डालें। उनमें अध्यात्मवाद उत्पन्न करें ताकि एक सुखद और मजबूत समाज की स्थापना की परिकल्पना को साकार किया जा सके।
इससे पूर्व, पुजारी संघ के अध्यक्ष इंद्र देव शास्त्री ने स्वागत करते हुए कर्मकाण्ड प्रशिक्षण कार्यशाला के बारे में प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ज्योतिष विशुद्ध रूप से विज्ञान है जो गणणा पर आधारित है। देश में अनेक विश्वविद्यालयों में ज्योतिष शास्त्र की शिक्षा प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि कर्मकाण्ड में शक्ति है और इसे समझने की आवश्यकता है।
अकादमी के सचिव राज कुमार, ज्योतिषाचार्य सुरेश शर्मा, रोशन लाल शर्मा, राज्य महिला आयोग की सदस्य मंजरी नेगी, हैण्डलूम के अध्यक्ष रोशन लाल शर्मा, पार्षद तरूण बिमल, जिला भाषा अधिकारी सुनीला ठाकुर सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर मौजूद रहे।















