DNN जाबली (सोलन) (संजीव अत्री)
20 अगस्त। शिक्षा विभाग में अस्पष्टता एवम् अनिश्चितता की स्थिति से अध्यापकों की पदोन्नति बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। आलम यह है कि प्रदेश के लगभग 500 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बिना मुखिया के चल रहे हैं। प्रदेश के अध्यापक शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों की उदासीनता से स्तब्ध हैं। हाल ही के समय में ऐसे विरोधाभासी विभागीय आदेश देखने को मिले जो विभाग की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं। वर्ष 2017 में एक्स सर्विसमेन के मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय को शिक्षा विभाग ने जिस तरह से तोड़ा मरोड़ा वह हैरान कर देने वाला है जब की इसी निर्णय को एक अन्य विभाग (अभियोजन विभाग) ने अक्षरशः लागू किया। उच्चतम न्यायालय ने डिमोबिलाइज्ड आर्म्ड फोर्सेज पर्सॉन्नेल रूल्स 1972, 5(1) को अपने 25 अगस्त 2017 के निर्णय में असंवैधानिक घोषित किया था।
इस नियम के अनुसार केवल उन्हीं पूर्व सैनिकों को सिविल सेवा में वरिष्ठता लाभ दिया गया था जो 1 नवम्बर 1962 से 10 जनवरी 1968 की अवधि में सेना में भर्ती हुए थे लेकिन देश में हिमाचल प्रदेश ही एक ऐसा राज्य बना जिसने ये सेवा लाभ सिविल सेवा में कार्यरत सभी पूर्व सैनिकों को दे दिए। लेकिन उच्चतम न्यायालय ने 2017 में दिए गए एक निर्णय में इस नियम को ही असंवैधानिक घोषित कर दिया। इस निर्णय को लेकर शिक्षा विभाग में अस्पष्टता एवम् असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। सरकार ने 30 जनवरी 2018 को एक अधिसूचना जारी की जिसमें इसे 2008 से लागू करने की बात कही गई। परिणास्वरूप विभाग में कार्यरत पूर्वसैनिकों की वरिष्ठता सूची संशोधित कर दी गई और उनको सिविल सेवा में दी गई वरिष्ठता वापिस ले ली गई। 25 फ़रवरी 2019 को एक और अधिसूचना जारी की गई जिसके तहत पूर्व सैनिकों की वरिष्ठता फिर से बहाल कर दी गई तथा इस निर्णय को 2017 से लागू करने की बात कही गई।
इन अधिसूचनाओं को प्रभावित पक्ष द्वारा उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका के रूप में चुनौती दी गई। लेकिन अवमानना याचिका लंबित होने के बावजूद विभाग में पूर्व सैनिकों को पदोन्नति जारी रखी गई है। सरकार द्वारा उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका के निपटारे तक पूर्व सैनिकों को पदोन्नत न करने का आश्वासन दिए जाने तथा उच्च न्यायालय द्वारा इस सम्बन्ध में अंतरिम आदेश देने के बावजूद विभाग पूर्व सैनिकों को पदोन्नत करता जा रहा है। अभी जुलाई 2020 में भी पांच पूर्व सैनिकों को शिक्षा उपनिदेशक के पद पर पदोन्नत किया गया। प्रिंसिपल प्रमोशन में भी सरकार इन्हें पदोन्नत करने पर विचार कर रही है। इस असमंजस में प्रिसिपल प्रमोशन सूची लंबित चल रही है। इसी तरह पिछले वर्ष निदेशालय स्तर पर प्रवक्ताओं की वरिष्ठता सूची में कुछ संशोधन किया गया जिसे प्रभावित पक्ष ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी जिस वजह से लंबे समय तक प्रमोशन पर रोक लगी रही जिसे प्राध्यापक संघ ने अपने प्रयासों से निरस्त करवाया।
प्राध्यापक संघ के राज्य वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ प्रदीप शर्मा, राज्य कानूनी सलाहकार डॉ एस के शर्मा, राज्य कार्यकारणी पदाधिकारी डॉ रणजीत वर्मा, रजनीश राणा, राज कुमार पराशर जिलाध्यक्ष जिला सोलन इकाई चंद्र देव ठाकुर, महासचिव विनोद चौहान, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुनीश कमल,वित्त सचिव सुशील शर्मा, जिला एक्शन कमेटी के चेयरमैन कमल वर्मा ,मुख्य सलाहकार भूपेंद्र शर्मा, भूपेश गुलेरिया, संजीव कौशल, राजेश शर्मा, मनोज शर्मा, संजीव कौशल, विजय कुमार, लोकेश गुप्ता आदि जिला पदाधिकारियों ने एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि विभागीय अधिकारियों द्वारा समय पर स्पष्ट निर्णय न लेने के कारण पिछले दो वर्षों से प्रधानाचार्यों की पदोन्नति सूची जारी नहीं हो पा रही है। पिछली पदोन्नति सूची नवम्बर 2018 में जारी की गई थी।














