DNN धर्मशाला
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में समूचा विश्व कोरोना वायरस के संकट से ग्रसित है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इसे वैश्विक महामारी घोषित किया गया है। वर्तमान में इस महामारी का चिकित्सा विज्ञान में कोई भी इलाज उपलब्ध नहीं है केवल बचाव ही इस महामारी से बचने की सबसे उत्तम दवा है। सर्वप्रथम नवीन कोरोना वायरस चीन के बुहान शहर से शुरू होकर पूरे विश्व में फैल गया ।
इस रोग में खांसी, बुखार, सांस लेने में तकलीफ आदि फ्लू जैसे लक्षण मिलते है। देश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारत सरकार सरकार द्वारा लॉकडाउन-4 की घोषणा कर दी गईं। हिमाचल प्रदेश में कोरोना पॉजिटिव एक्टिव मामलों में से 29 मामले कांगड़ा जिला से संबधित हैं। इन पॉजिटिव मामलों का उपचार बैजनाथ स्थित पंचायतीराज प्रशिक्षण केंद्र तथा टांडा मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है। प्रदेश और जिला प्रशासन द्वारा इस महामारी से निपटने के लिए पुख्ता प्रबंध किए गए है ।
उपायुक्त राकेश प्रजापति के अनुसार कोविड-19 के संकट के दौरान जिला में करीब 80 हजार जरूरतमंद लोगों को राशन उपलब्ध करवाया गया है जिनमें करीब 50 हजार प्रवासी मजदूर शामिल है। इसके अतिरिक्त जिला में बाहरी राज्यों के फंसे लगभग 15 हजार व्यक्तियों को वापिस उनके घर भेजने के लिए फूलप्रूफ प्रबंध किए गए जिनमें से 5295 व्यक्ति पंजाब और 4111 जम्मू कश्मीर भेजे गए। उपायुक्त कांगड़ा ने बताया कि जिला में बाहर से आए 52000 व्यक्तियों को होम क्वांरटाईन पर और 1000 व्यक्तियों को जिला में स्थापित क्वांरटाईन केंद्रों में रखा गया है । जिला की सभी सीमाओं को सील कर दिया गया है जबकि कोरोना एक्टिव मामलों की पंचायतों को रेड जोन घोषित किया गया है । इसके अतिरिक्त बाहर से आने वाले सभी व्यक्तियों की जिला में प्रवेश से पहले थर्मल स्क्रींनिंग की जा रही है ।
प्रदेश सरकार द्वारा लॉकडाउन और कर्फ्यू में दी गई ढील के उपरांत जिला में पुनः विकास कार्य आरंभ कर दिए गए है। जिला में मनरेगा कार्य आरंभ होने से करीब 9548 व्यक्तियों को घरद्वार पर रोजगार मिला है। लॉकडाउन के दौरान जिला में आवश्यक सेवाओं को जारी रखा गया तथा प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य सहित अनेक विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा अपनी जान को जोखिम में डालकर कोरोना योद्धा बनकर लोगों की इस महामारी से सुरक्षा करने मंे अहम भूमिका निभाई जा रही है। जिला में सभी बीपीएल, अन्तोदय और पीएच परिवारों के प्रत्येक सदस्य को पांच किलोग्राम चावल मुफ्त उपलब्ध करवाया गया। इसके अतिरिक्त एक किलोग्राम काले चना भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। देशव्यापी संकट में अनेक स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा भी मास्क वितरित और जरूरतमंद लोगों को राशन प्रदान करने में अपना रचनात्मक सहयोग दिया जा रहा है।















