जानिए… कौनसा जिला है भूकम्प की दृष्टि से अतिसंवेदनशील

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DNN धर्मशाला
वर्तमान दौर में आपदा प्रबंधन की नितांत आवश्यकता है, युवा पीढ़ी, स्कूली बच्चों को आपदा प्रबंधन में दक्ष बनाने के लिए कारगर कदम उठाने चाहिए ताकि भूकम्प या अन्य आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। यह उदगार केन्द्रीय विश्वविद्यालय के उपकुलपति कुलदीप चन्द अग्निहोत्री ने आज 1905 ई0 के कांगड़ा भूकम्प की स्मृति में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन कार्यशाला का शुभारम्भ करने के उपरांत दी। 03 से 04 अप्रैल, 2019 तक चलने वाली यह कार्यशाला हिमाचल प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय तथा राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में राजकीय महाविद्यालय के त्रिर्गत सभागार में आयोजित की जा रही है।   
  उपकुलपति ने कहा कि जिला कांगड़ा भूकम्प की दृष्टि से अतिसंवेदनशील क्षेत्र में आता है। अतः जिला प्रशासन को भूकम्प जैसी किसी भी आपदा की स्थिति से निपटने के लिए अपनी तैयारियां पूरी रखनी चाहिए। उन्होंने कार्यशाला में उपस्थित अधिकारियों को कहा कि वे आपदा प्रबंधन को लेकर संयुक्त तौर पर कार्ययोजना तैयार करें तथा अपने-अपने विभागों के निचले स्तर के अधिकारियों व कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन के बारे में भी जागरूक भी करें। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि नये मकानों का निर्माण नई भूकम्परोधी तकनीकी से बनवाएं।  
  इस कार्यशाला में निदेशक-सह-विशेष सचिव(राजस्व) डीसी राणा, केन्द्रीय विश्वविद्यालय के प्रो वाइस चांसलर हंसराज, उपायुक्त कांगड़ा संदीप कुमार, पूर्व सदस्य राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, भारत सरकार प्रो.एचके गुप्ता आपदा प्रबंधन के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पहाड़ी राज्य होने के कारण हिमाचल प्रदेश में आपदाओं के घटित होने की अधिक संभावना है। उन्होंने कहा कि आपदा का कोई भी समय तथा स्थान निर्धारित नहीं होता है, इसलिए जिला प्रशासन को अपने सभी विभागों के साथ ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए पूर्णतया तैयार रहना होगा, ताकि आपदाओं से होने वाले जान-माल के नुकसान से बचा जा सके।
इस अवसर पर आपदा से बचाव हेतू प्रदर्शनी का भी लगाई गई थी।

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