DNN सोलन
26 अगस्त। डॉ. यशवंत सिंह परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के व्यवसाय प्रबंधन विभाग ने इस सप्ताह विश्वविद्यालय परिसर में कृषि के भविष्य को सशक्त बनाने वाले कृषि व्यवसाय और कृषि उद्यमिता पर तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला को राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना की संस्थागत विकास योजना (आईडीपी) द्वारा प्रायोजित किया गया था।
कार्यशाला को प्रतिभागियों को कृषि की गतिशील और प्रतिस्पर्धी दुनिया में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक ज्ञान कौशल और मानसिकता से लैस करने के लिए डिज़ाइन किया गया था। कार्यशाला में बागवानी महाविद्यालय से ई॰एल॰पी॰ छात्रों और वानिकी महाविद्यालय से रावे के छात्रों सहित लगभग 100 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यशाला के दौरान कृषि व्यवसाय के विभिन्न पहलुओं, मूल्य श्रृंखला को समझने से लेकर कृषि क्षेत्र में नवीन उद्यमशीलता दृष्टिकोण विकसित करने को शामिल किया गया। डॉ. केके रैना, लाइब्रेरियन और प्रधान अन्वेषक आईडीपी और डॉ. कपिल कथूरिया, विभाग अध्यक्ष बिजनेस मैनेजमेंट विभाग कार्यशाला के कनवीनर रहे जबकि डॉ. रश्मी चौधरी समन्वयक और डॉ. यास्मीन जांझुआ सह समन्वयक रहीं।
कार्यशाला के दौरान नौणी, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, चितकारा विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों के 13 अनुभवी शिक्षाविदों, कृषि व्यवसाय विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को विभिन्न अवधारणाओं और तकनीकों को लागू करने के लिए इंटरैक्टिव सत्र और व्यावहारिक गतिविधियों में शामिल करके मार्गदर्शन किया।
समापन सत्र के दौरान अनुसंधान निदेशक डॉ. संजीव चौहान मुख्य अतिथि रहे। डॉ. कपिल कथूरिया ने प्रतिभागियों और मुख्य अतिथि का स्वागत किया और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी। डॉ. केके रैना ने आईडीपी के तहत कार्यशाला के घटकों के बारे में जानकारी दी। डॉ चौहान ने छात्रों को लाभान्वित करने वाले विषयों का चयन करने के लिए कार्यशाला आयोजकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को कृषि क्षेत्र में अपना उद्यम स्थापित करने की दिशा में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नौकरी चाहने वालों के बजाय नौकरी प्रदाता बनने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए ताकि इस क्षेत्र की प्रगति के लिए नए विचारों और प्रौद्योगिकियों को नियोजित किया जा सके। इस अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किये।















