DNN बद्दी (आदित चड्डा)
कांग्रेस कमेटी के प्रेदश महासचिव व सोलन के प्रभारी केवल सिंह पठानिया ने कहा कि सोलन जिले में पंचायती चुनाव का रोस्टर राजनीति आधार पर जारी किया है। उपायुक्त कार्यालय में तीन बार इस रोस्टर को मंगाया गया और यह पूरी तरह से राजनीति आधार पर जारी किया है। वे अपने उच्च अधिकारियों को इसके बारे में मुख्य चुनाव अधिकारी को शिकायत पत्र लिखने के लिए सिफारिश करेंगे।
केवल सिंह पठानिया ने आज नालागढ़ वे दून में ब्लाक काग्रेस कमेटी के साथ की बैठक उन्होंने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार तीन साल में हर मोरचे पर विफल हुई है। कोरोना माहामारी के दौरान लोगों को राहत दिलाने के बजाए उल्टा उन्हें तंग करने पर लगी है। सरकार को चाहिए था कि अधिसूचना जारी करने के बाद लोगों को सेनीटाईजर व मास्क उपलब्ध कराती। पहले ही महामारी से दुखी लोगों पर अधिसूचना जारी करके बिना मास्क के एक हजार रुपये चालान करना शुरू कर दिया है। सभी लोग इतने अमीर नहीं है। एक हजार रुपये इस मुसीबत की घड़ी में किसी की भी जेब पर डाका मारने वाली बात है।
उन्होने कहा कि दिल्ली के पांच बार्डरों पर किसान तीन काले कानूनों को लेकर आंदोलन कर रहे है। लाल किले पर किसानों के आय को दो गुणा करने वाले प्रधानमंत्री अब किसानों की बात भी सुनने को तैयार नहीं है। आंदोलन के दौरान ठंड से एक दर्जन किसान मर चुके है। बेरोजगारी की हितेषी बनने वाली सरकार श्वेत पत्र जारी करे कि कोरोना के समय में कितने लोगों का रोजगार छिना है। आज हर गांव में 30 फीसदी लोग बेरोजगार बैठे है। सरकार उनके बारे में कुछ नहीं सोच रही है।
पठानिया ने कहा कि आने वाले पंचायत चुनाव में जनता इन सभी जन विरोधी कानूनों के खिलाफ सरकार को सबक सिखाएगी। कांग्रेस आने वाले चुनाव में बूथ स्तर पर कमेटी का गठन कर संगठन को मजबूत करेगी। सोमवार को सोलन में होने वाली बैठक में पंचायत चुनाव को लेकर रणनीति तैयार की जाएगी।
स्थानीय लोगों का रोजगार छिनने की तैयारी
प्रदेश महासचिव केवल सिंह पठनिया ने दून ब्लाक कमेटी के साथ बैठक के दोरान प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार की गलत नीतियों के चलते स्थानीय लोगों का रोजगार छीना जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री लोकल फॉर वोकल की बात करते है, लेकिन यहां बीबीएन में दस हजार ट्रक संचालकों के रोजगार पर तलवार लटका दी है। उनका रोजगार छिनने जा रहा है और उद्योग पति भी स्थानीय लोगों को कोपरेट नहीं कर रहे है। सरकार इस बारे में चुपी साधे है। यह दस हजार ट्रक संचालक दो लाख लोगों की रोजी रोटी चलाते है।
















