मौनपालकों को शहद एवं हाईव उत्पादों पर दी जानकारी

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DNN सोलन/नौणी

3 दिसंबर। डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कीट विज्ञान विभाग द्वारा राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड द्वारा वित्त पोषित परियोजना ‘हिमाचल प्रदेश में टिकाऊ उच्च-पहाड़ी मधुमक्खी पालन’ के लिए शहद और अन्य हाइव उत्पाद उत्पादन मॉडल के तहत सात दिवसीय विशिष्ट मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया।

प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजेश्वर सिंह चन्देल मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने प्रतिभागियों को मधुमक्खी से प्राप्त शहद के अलावा अन्य उत्पादों के महत्व के बारे में बताया और विशेषकर उन उत्पादों की मार्केटिंग, और पैकेजिंग पर जोर दिया। प्रो. चंदेल ने कहा कि प्रदेश की देसी मधुमक्खी के शहद को ब्रांड के रूप में पहचान मिलनी चाहिए। इसके लिए सभी को इसकी शुद्धता, गुणवत्ता को बनाए रखना चाहिए। मधुमक्खी पालन के व्यवसाय को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले इसके लिए सभी मोनपालकों को समूह  में काम करना होगा।

कीट विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुभाष वर्मा ने बताया कि इस प्रशिक्षण शिविर में सोलन, शिमला, सिरमौर, कांगड़ा एवं बिलासपुर के 25 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। ग्लोबल एपीअरी कम्पनी से मदन शर्मा ने प्रतिभागीयों को मधुमक्खी पालन से प्राप्त होने वाले विभिन्न उत्पादों की मार्केटिंग, ब्रान्डींग एवं पेकेजिंग के बारे में जानकारी दी। इस परियोजना की प्रधान अन्वेषक डॉ. मीना ठाकुर ने गतिविधियों के अंतर्गत विश्वविद्यालय के विभिन्न अनुसंधान केन्द्रों पर चल रही गतिविधियों के बारे में बताया। इस प्रशिक्षण शिविर के अंतर्गत प्रतिभागियों का एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केंद्र, रामनगर, कुरुक्षेत्र का एक्सपोजर विजिट भी करवाई गई।  इस अवसर पर वैज्ञानिक डॉ राकेश कुमार, डॉ विश्वगौरव चंदेल, डॉ मंगला राम, डॉ रोहित ठाकुर एवं विभाग के कर्मचारी एवं छात्र मौजूद रहे।

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